होक्काइडो द्वीप पर स्टेशन बंद करने का फैसला टला, शिक्षा न रुके इसलिए रोज़ एक सवारी के लिए दौड़ती रही ट्रेन — दुनिया भर में मिसाल बनी यह कहानी
जब भारत में दिवाली और छठ पर ट्रेनों में भीड़ से ठसाठस भरे डिब्बे चल रहे हैं, वहीं जापान में एक ऐसी ट्रेन थी जो पूरे तीन साल तक सिर्फ एक छात्रा के लिए चलती रही। यह अनोखी मिसाल न केवल रेलवे की सेवा भावना को दर्शाती है बल्कि यह दिखाती है कि शिक्षा के लिए एक देश कितनी संवेदनशीलता दिखा सकता है।
नई दिल्ली (ए)। इस वक्त भारत में त्योहारी सीजन के कारण रेल यात्राओं में जबरदस्त भीड़ देखी जा रही है — जनरल कोचों में ठसाठस भीड़, लंबी वेटिंग और टिकट के लिए मारामारी। लेकिन सोचिए, कहीं कोई ट्रेन सिर्फ एक यात्री को लेकर चले तो? यह बात भले अजीब लगे, लेकिन जापान में ऐसा तीन साल तक होता रहा।
जापान के होक्काइडो द्वीप पर क्यू-शिराताकी स्टेशन को वर्ष 2016 में बंद करने का निर्णय लिया गया था। लेकिन उसी गांव की एक छात्रा काना हराडा रोज़ इसी ट्रेन से स्कूल जाती थी। जब कंपनी ने स्टेशन बंद करने का फैसला किया, तो छात्रा ने गुहार लगाई कि इससे उसकी पढ़ाई रुक जाएगी, क्योंकि कॉलेज जाने का और कोई साधन नहीं है।
शिक्षा के महत्व को देखते हुए रेलवे कंपनी ने स्टेशन बंद करने का फैसला टाल दिया और तीन वर्षों तक यह ट्रेन सिर्फ उसी छात्रा के लिए चलती रही। हर सुबह वह क्यू-शिराताकी स्टेशन से ट्रेन में बैठती और शाम को वापस लौटती — अकेली यात्री के रूप में।
रेलवे प्रशासन ने यह व्यवस्था तब तक जारी रखी जब तक छात्रा ने अपनी पढ़ाई पूरी नहीं कर ली। जैसे ही वह ग्रेजुएशन पूरी कर कॉलेज से पास हुई, स्टेशन को औपचारिक रूप से बंद कर दिया गया।
दरअसल, इस इलाके की आबादी तेजी से घट रही थी। पूरी बस्ती में मात्र 36 लोग ही बचे थे। ऐसे में स्टेशन को चालू रखना रेलवे कंपनी के लिए घाटे का सौदा था, मगर शिक्षा के सम्मान में उसने यह ‘घाटा’ तीन साल तक उठाया।
इस घटना ने पूरी दुनिया में रेलवे सेवा के प्रति सम्मान और संवेदनशीलता का उदाहरण पेश किया। लोगों ने सोशल मीडिया पर जापानी रेलवे की सराहना करते हुए लिखा — “जहां शिक्षा को इतनी प्राथमिकता दी जाती है, वही समाज सच्चे अर्थों में प्रगतिशील कहा जा सकता है।”