हादसे के 18 घंटे बाद भी नहीं हो सकी शवों की पहचान, परिवार जोधपुर-जयसलमेर अस्पतालों में कर रहे इंतज़ार
राजस्थान के जैसलमेर में मंगलवार को हुए भीषण बस अग्निकांड ने पूरे प्रदेश को दहला दिया। जोधपुर-जयसलमेर हाईवे पर दौड़ती एसी स्लीपर बस देखते ही देखते आग के गोले में बदल गई। हादसे में 20 यात्रियों की जिंदा जलकर मौत हो गई, जबकि 15 से ज़्यादा लोग झुलस गए। मृतकों की पहचान न हो पाने के कारण अब डीएनए सैंपलिंग शुरू की गई है।
जैसलमेर (ए)। जैसलमेर-जोधपुर हाईवे पर मंगलवार दोपहर करीब साढ़े तीन बजे एक एसी स्लीपर बस में अचानक आग लग गई। कुछ ही मिनटों में लपटों ने पूरी बस को अपनी चपेट में ले लिया। चीख-पुकार के बीच जो यात्री सामने की ओर थे, वे किसी तरह खिड़कियां तोड़कर बाहर निकले, लेकिन पीछे बैठे यात्री आग में घिर गए। हादसे की भयावहता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि कई शव बस की बॉडी से चिपक गए और कुछ यात्रियों के शरीर पूरी तरह राख में बदल गए।
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आग लगने के कारणों को लेकर अब तक कई दावे सामने आए हैं। शुरुआती जांच में शॉर्ट सर्किट और एसी कम्प्रेशर पाइप फटने की बात कही गई थी, वहीं स्थानीय लोगों का कहना है कि बस की डिग्गी में पटाखे रखे थे, जिससे आग ने विकराल रूप ले लिया।
हादसे के बाद राहत-बचाव कार्य के लिए सेना की मदद ली गई। देर रात तक सभी शवों को बस से निकाल लिया गया और जोधपुर के महात्मा गांधी अस्पताल भेजा गया। एक शव पहले से वहीं मौजूद था। कुल 20 मृतकों की पहचान के लिए अब परिजनों के डीएनए सैंपल लिए जा रहे हैं। इसके लिए जोधपुर और जैसलमेर दोनों जगह विशेष लैब की व्यवस्था की गई है।
मरने वालों में एक पत्रकार राजेंद्र चौहान और एक ही परिवार के पाँच सदस्य भी शामिल हैं। वहीं, 15 घायलों में एक कपल भी है जो जोधपुर में प्री-वेडिंग शूट करवाकर लौट रहा था।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस भीषण दुर्घटना पर गहरा दुख जताया है। पीएम राहत कोष से मृतकों के परिवारों को दो-दो लाख रुपए और घायलों को पचास-पचास हजार रुपए की सहायता राशि देने की घोषणा की गई है।
राजस्थान सरकार ने हादसे की जांच के आदेश दे दिए हैं। केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने बताया कि बस में धमाके की आवाज सुनाई दी थी, संभवतः एसी कंप्रेशर फटा और गैस व डीजल के संपर्क में आने से भीषण आग लगी। उन्होंने कहा, “कुछ यात्री तो इतने जल गए कि पहचान करना भी मुश्किल है।”