अमेरिका में ‘वीजा स्टैम्पिंग’ का नया बखेड़ा: टेक दिग्गजों ने जारी किया ‘ट्रैवल रेड अलर्ट’; छुट्टियों में भारत आने वाले इंजीनियरों के लिए बढ़ीं मुश्किलें, प्रोजेक्ट्स पर मंडराया संकट।
सिलिकॉन वैली(ए) : अमेरिका के सिलिकॉन वैली से एक ऐसी खबर आई है जिसने सात समंदर पार बैठे हजारों भारतीय आईटी पेशेवरों की नींद उड़ा दी है। वैश्विक टेक दिग्गज गूगल (Google) और एप्पल (Apple) ने अपने विदेशी कर्मचारियों के लिए एक आपातकालीन ‘ट्रैवल एडवाइजरी’ जारी की है। कंपनियों ने सख्त हिदायत दी है कि फिलहाल अमेरिका की सीमा से बाहर कदम न रखें। इस चेतावनी का मुख्य आधार अमेरिकी दूतावासों में वीजा स्टैम्पिंग की प्रक्रिया में होने वाली असाधारण देरी है। छुट्टियों के इस मौसम में घर लौटने की तैयारी कर रहे भारतीयों के लिए यह खबर किसी बड़े झटके से कम नहीं है। पंचायत लाला न्यूज़ की इस विशेष रिपोर्ट में जानिए आखिर क्यों बंद हो रहे हैं वापसी के दरवाजे।
घर वापसी पर ‘वीजा’ का पहरा: क्यों डरी हुई हैं टेक कंपनियां?
दिसंबर और जनवरी का महीना छुट्टियों का होता है, लेकिन इस साल अमेरिका में काम कर रहे विदेशी नागरिकों के लिए यह ‘वीजा काल’ जैसा साबित हो रहा है। दरअसल, H-1B और L-1 वीजा पर काम कर रहे कर्मचारियों को अमेरिका लौटने के लिए पासपोर्ट पर नई स्टैम्पिंग करवानी होती है। भारत समेत कई प्रमुख देशों में अमेरिकी दूतावासों में ‘वेटिंग पीरियड’ कई महीनों तक खिंच गया है। गूगल और एप्पल जैसी कंपनियों को डर है कि यदि उनके ‘क्रिटिकल टैलेंट’ यानी मुख्य इंजीनियर या प्रोजेक्ट लीडर्स एक बार बाहर गए, तो वे महीनों तक वहीं फंस सकते हैं। इससे कंपनियों के अरबों डॉलर के प्रोजेक्ट्स बीच में ही लटक जाने का खतरा पैदा हो गया है।
‘प्रशासनिक चक्रव्यूह’ में फंसे भारतीय इंजीनियर
गूगल और एप्पल के कार्यबल में भारतीयों की संख्या सबसे अधिक है। एप्पल द्वारा जारी किए गए एक आंतरिक मेमो में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि प्रशासनिक जांच और नियुक्तियों की कमी के कारण यात्रा को तब तक टालें जब तक कि कोई बड़ी इमरजेंसी न हो। इस संकट के पीछे तीन प्रमुख कारण हैं:
आवेदन का भारी अंबार
दूतावासों में लंबित आवेदनों की संख्या अब एक ‘पहाड़’ जैसी हो गई है। कोरोना काल के दौरान जो काम रुका था, उसकी भरपाई आज भी नहीं हो पाई है। भारत जैसे देशों में, जहाँ से सबसे ज्यादा आईटी प्रोफेशनल अमेरिका जाते हैं, वहां H-1B और L-1 वीजा के लिए वेटिंग पीरियड कई महीनों तक पहुंच गया है। हालत यह है कि अगर कोई आज अपॉइंटमेंट बुक करना चाहे, तो उसे अगले कई महीनों तक की कोई खाली तारीख नहीं दिखती। इस वजह से कर्मचारी ‘इमरजेंसी अपॉइंटमेंट’ के भरोसे देश छोड़ने का जोखिम नहीं लेना चाहते।
यह उन कर्मचारियों के लिए सबसे बड़ा डर है जिनका इंटरव्यू सफल हो जाता है, लेकिन फिर भी उन्हें वीजा नहीं मिलता। ‘सेक्शन 221(g)’ के तहत अधिकारी फाइल पर ‘प्रशासनिक जांच’ (Administrative Processing) की मुहर लगा देते हैं।
: इसके नाम पर दूतावास कर्मचारी के बैकग्राउंड, कंपनी की प्रामाणिकता और प्रोजेक्ट की बारीकियों की दोबारा जांच करते हैं।
इस जांच की कोई निश्चित समय सीमा नहीं होती। किसी की फाइल 2 हफ्ते में क्लियर हो जाती है, तो कोई 6 महीने तक फंसा रहता है। गूगल और एप्पल को डर है कि उनके अहम पदों पर बैठे लोग इस ‘प्रशासनिक चक्रव्यूह’ में फंस गए, तो प्रोजेक्ट की डेडलाइन खत्म हो जाएगी।
हाल ही में अमेरिका ने एक पायलट प्रोग्राम शुरू किया है जिससे कर्मचारी अमेरिका के भीतर ही अपना वीजा रिन्यू करा सकते हैं और उन्हें वापस भारत आने की जरूरत नहीं पड़ती। लेकिन यह सुधार अभी ‘ऊंट के मुंह में जीरा’ जैसा है:
सीमित श्रेणी: यह सुविधा अभी केवल कुछ चुनिंदा श्रेणियों (जैसे H-1B) के लिए ही उपलब्ध है।
सख्त शर्तें: इसमें आवेदन करने की शर्तें इतनी कठिन हैं कि अधिकांश कर्मचारी इसके दायरे में ही नहीं आते।
धीमी प्रक्रिया: चूंकि यह अभी प्रायोगिक (Pilot) चरण में है, इसलिए यह बहुत कम आवेदनों को स्वीकार कर रहा है। परिणामतः, हजारों कर्मचारी अभी भी पुराने ढर्रे पर ही निर्भर हैं, जहाँ उन्हें स्टैम्पिंग के लिए देश से बाहर जाना ही पड़ता है।
नौकरी और परिवार के बीच ‘त्रिशंकु’ बने कर्मचारी
कंपनियों की इस सलाह ने कर्मचारियों के सामने गंभीर संकट खड़ा कर दिया है। अगर कोई कर्मचारी घर की मजबूरी में भारत आता है और उसका वीजा समय पर स्टैम्प नहीं होता, तो उसकी नौकरी पर तलवार लटक सकती है। कई लोग अपने परिवार के साथ अमेरिका में बस चुके हैं, उनके लिए यह ‘वीजा देरी’ मानसिक और वित्तीय तनाव का कारण बन रही है। टेक जगत के जानकारों का मानना है कि यह स्थिति न केवल कर्मचारियों के लिए, बल्कि अमेरिका की इमिग्रेशन व्यवस्था की साख के लिए भी एक बड़ी चुनौती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि भारत आना अनिवार्य है, तो कर्मचारियों को अपने एम्प्लॉयमेंट वेरिफिकेशन और लीगल दस्तावेजों का पूरा सेट साथ रखना चाहिए। गूगल ने अपने कर्मचारियों को एक विशेष कानूनी टीम (Legal Team) से परामर्श करने की सलाह दी है। याद रखें, नियमों की थोड़ी सी भी अनदेखी आपको महीनों तक विदेश में फंसा सकती है। गूगल और एप्पल का यह कड़ा रुख स्पष्ट करता है कि अमेरिकी इमिग्रेशन सिस्टम की सुस्ती अब वैश्विक व्यापार और तकनीक की रफ्तार को थामने लगी है। यह संकट आने वाले महीनों में और गहरा सकता है।