एक ही दिन में निवेशकों की तिजोरी में बरसे 5 लाख करोड़ रुपये; आईटी और मेटल के शेयरों में मची ‘लूट’, 26,000 के पार पहुंचा निफ्टी का जादू
मुंबई(ए) : भारतीय शेयर बाजार ने आज वैश्विक मंदी की आशंकाओं को धता बताते हुए एक ऐसा ‘बुल रन’ पेश किया है, जिसे आने वाले कई वर्षों तक याद रखा जाएगा। सोमवार, 22 दिसंबर 2025 का सूरज दलाल स्ट्रीट के लिए खुशियों की नई किरण लेकर आया, जहाँ निफ्टी और सेंसेक्स ने अपने पुराने सभी रिकॉर्ड्स को ध्वस्त कर दिया। बाजार खुलते ही निवेशकों के भारी उत्साह ने ट्रेडिंग चार्ट्स पर ऐसी लकीर खींची कि दिन ढलते-ढलते भारत की आर्थिक शक्ति का डंका पूरी दुनिया में बजने लगा। पंचायत लाला न्यूज़ की इस ग्राउंड रिपोर्ट में जानिए कि कैसे आज बाजार ने निवेशकों को मालामाल कर दिया और इस ‘तूफानी तेजी’ के पीछे कौन से अदृश्य कारक काम कर रहे थे।
सोमवार का दिन भारतीय निवेशकों के लिए किसी त्योहार से कम नहीं रहा। सेंसेक्स ने आज 85,567.48 के अकल्पनीय स्तर पर अपनी क्लोजिंग देकर इतिहास के पन्नों में अपना नाम दर्ज कराया। महज एक दिन के कारोबार में इसमें 638 अंकों से अधिक की रिकॉर्ड वृद्धि देखी गई। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का बेंचमार्क इंडेक्स निफ्टी भी पीछे नहीं रहा; इसने 206 अंकों की लंबी छलांग लगाते हुए 26,172.40 के ऐतिहासिक शिखर को छू लिया। इस ‘रॉकेट’ जैसी रफ्तार का नतीजा यह हुआ कि बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार मूल्य 475 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच गया। यानी, आज निवेशकों की संपत्ति में पलक झपकते ही 5 लाख करोड़ रुपये का बंपर इजाफा हुआ।
आज की इस ऐतिहासिक तेजी के पीछे दो प्रमुख ‘इंजन’ काम कर रहे थे—आईटी और मेटल सेक्टर। अमेरिकी बाजारों से मिले सकारात्मक संकेतों ने भारतीय आईटी कंपनियों जैसे इंफोसिस, विप्रो और टेक महिंद्रा में नई जान फूंक दी और इनके शेयरों में भारी लिवाली देखी गई। वहीं, मेटल सेक्टर में आई चमक ने निवेशकों को अपनी ओर आकर्षित किया। चीन द्वारा आर्थिक राहत पैकेज की घोषणा और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्टील व लोहे की बढ़ती मांग ने टाटा स्टील और जेएसडब्ल्यू स्टील को ‘सुपरफास्ट’ बना दिया। इसके अलावा, टाटा मोटर्स और ट्रेंट जैसे कंज्यूमर शेयरों ने भी अपनी नई ऊंचाई को छूकर मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में खुशहाली फैला दी।
बाजार के विशेषज्ञों के अनुसार, इस ऐतिहासिक उछाल के पीछे विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) का अटूट विश्वास है। डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये की मजबूती और कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता ने विदेशी फंडों को भारत में निवेश के लिए प्रेरित किया। इसके अलावा, ‘इंडिया विक्स’ (India VIX) यानी बाजार में डर को मापने वाले सूचकांक में आई भारी गिरावट यह दर्शाती है कि निवेशक अब बाजार को लेकर पूरी तरह बेखौफ हैं। अमेरिका में ब्याज दरों में संभावित कटौती की खबरों ने भी आग में घी का काम किया और बाजार को रिकॉर्ड स्तरों पर पहुंचा दिया।
बाजार जब अपने सातवें आसमान पर हो, तो सावधानी ही सबसे बड़ा हथियार है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह समय ‘अंधाधुंध निवेश’ का नहीं, बल्कि ‘रणनीतिक मुनाफे’ का है। अगर आप अच्छे मुनाफे में हैं, तो पोर्टफोलियो को थोड़ा हल्का करना और मुनाफे को सुरक्षित करना बुद्धिमानी होगी। नए निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे बाजार की इस दौड़ में ‘फोमो’ (छूट जाने का डर) का शिकार न हों और केवल उन शेयरों पर ध्यान दें जिनमें लंबी अवधि की क्षमता है। ‘बाय ऑन डिप्स’ यानी गिरावट में खरीदारी की नीति ही आने वाले समय में आपको सफल बनाएगी। निफ्टी का 26,000 और सेंसेक्स का 85,000 के ऊपर मजबूती से टिकना भारत के आर्थिक ‘अमृत काल’ की सबसे बड़ी विजय है। यह न केवल निवेशकों की जीत है, बल्कि भारतीय अर्थव्यवस्था की वैश्विक स्वीकार्यता का प्रमाण भी है।