बाजार में भारी उतार-चढ़ाव का दौर जारी, ऑटो और मीडिया शेयरों में बिकवाली से निवेशकों के डूबे करोड़ों रुपए
मुंबई (ए) : भारतीय शेयर बाजार में आज भारी उथल-पुथल देखने को मिल रही है और निवेशकों के बीच अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। दिन की शुरुआत में निचले स्तरों से 700 अंकों की शानदार रिकवरी दिखाने के बाद सेंसेक्स ऊपरी स्तरों पर अपनी बढ़त बरकरार नहीं रख सका और एक बार फिर लाल निशान में आ गया है। फिलहाल सेंसेक्स करीब 250 अंकों की बड़ी गिरावट के साथ 81,300 के महत्वपूर्ण स्तर से नीचे कारोबार कर रहा है। वहीं निफ्टी में भी 70 अंकों से ज्यादा की सुस्ती दर्ज की गई है, जिससे यह 25,000 के मनोवैज्ञानिक स्तर को तोड़ते हुए 24,980 के पास आ गया है। बाजार की इस शुरुआती बढ़त को खत्म करने में ऑटो और मीडिया सेक्टर के शेयरों में हुई भारी बिकवाली ने मुख्य भूमिका निभाई है, हालांकि मेटल शेयरों में आज खरीदारी का रुझान देखा जा रहा है।
ग्लोबल मार्केट में तेजी के बावजूद घरेलू बाजार पर विदेशी निवेशकों की बिकवाली का भारी दबाव
वैश्विक बाजारों से मिल रहे सकारात्मक संकेतों के बावजूद भारतीय बाजार दबाव में नजर आ रहे हैं। एशियाई बाजारों की बात करें तो कोरिया का कोस्पी और जापान का निक्केई इंडेक्स बढ़त के साथ कारोबार कर रहे हैं, वहीं अमेरिकी बाजारों में भी पिछले सत्र में तेजी देखी गई थी। इसके उलट भारतीय बाजार में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) का रुख लगातार नकारात्मक बना हुआ है। हालिया आंकड़ों के मुताबिक, 23 जनवरी को विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार से ₹3,191 करोड़ के शेयर बेचकर पैसा बाहर निकाला है। हालांकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने ₹3,173 करोड़ की खरीदारी कर बाजार को संभालने की कोशिश की है, लेकिन एफआईआई की लगातार बिकवाली ने सेंटीमेंट को कमजोर कर दिया है।
दिसंबर से जारी है बिकवाली का सिलसिला, निवेशकों को सता रही है और गिरावट की चिंता
शेयर बाजार में गिरावट का यह दौर पिछले कुछ समय से लगातार बना हुआ है। पिछले शुक्रवार यानी 23 जनवरी को भी बाजार में बड़ी गिरावट दर्ज की गई थी, जब सेंसेक्स 770 अंक गिरकर बंद हुआ था। गौरतलब है कि दिसंबर 2025 के महीने में भी विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार से कुल ₹34,350 करोड़ के शेयर बेचे थे। हालांकि उस दौरान घरेलू निवेशकों ने लगभग ₹80,000 करोड़ का निवेश कर बाजार को ढहने से बचाया था। आज की बिकवाली ने एक बार फिर निवेशकों को चिंता में डाल दिया है, क्योंकि निफ्टी के 25,000 के स्तर से नीचे जाने को तकनीकी रूप से कमजोरी का संकेत माना जा रहा है। बाजार विशेषज्ञों की नजर अब इस बात पर है कि क्या घरेलू निवेशक इस गिरावट को रोकने में सफल हो पाते हैं या नहीं।