कुसमुंडा और जटगा के बीच बिछाई जा रही नई रेल लाइन को काटकर ले गए संगठित गिरोह के सदस्य पुलिस महकमे में मचा हड़कंप
कोरबा (ए) : छत्तीसगढ़ के ऊर्जाधानी कोरबा में कबाड़ चोरों के हौसले इस कदर बुलंद हैं कि अब वे सरकारी संपत्तियों को अपना निशाना बना रहे हैं। ब्रिज का तीस टन लोहा चोरी करने के बाद अब चोरों ने कुसमुंडा से जटगा के बीच बन रही नई रेल लाइन की पटरियों को ही काटकर गायब कर दिया है। गेवरा-पेंड्रा नई रेल लाइन प्रोजेक्ट के तहत बिछाई जा रही इस पटरी के साथ-साथ लोहे की प्लेटें और करोड़ों की भारी मशीनरी भी चोरी कर ली गई है जिससे रेलवे और निर्माण कंपनी को करीब दो करोड़ रुपए का भारी नुकसान हुआ है।
गैस कटर से काटी गई पटरियां और हाइड्रा मशीन के भी तोड़े शीशे शिवाकृति कंपनी ने दर्ज कराई एफ-आई-आर
यह बड़ी वारदात बांकी मोंगरा और कटघोरा थाना क्षेत्र के अंतर्गत हुई है जहां शिवाकृति प्राइवेट कंपनी द्वारा रेल लाइन बिछाने का काम किया जा रहा है। कंपनी के अधिकारियों के मुताबिक चोरों ने न केवल कीमती पटरियों को टुकड़ों में काटकर पार किया बल्कि निर्माण स्थल पर खड़ी हाइड्रा मशीन के शीशे भी तोड़ दिए और मशीनरी के महत्वपूर्ण हिस्सों को क्षतिग्रस्त कर दिया। इस लगातार हो रही चोरी की घटनाओं की वजह से प्रोजेक्ट की समय-सीमा पर बुरा असर पड़ रहा है और वहां काम करने वाले मजदूरों में भी दहशत का माहौल बना हुआ है।
सुनसान इलाकों का फायदा उठा रहा कबाड़ चोरों का संगठित गिरोह और रात के अंधेरे में हो रही वारदातें
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक लखन पटले ने मामले की गंभीरता को देखते हुए घटनास्थल का निरीक्षण किया है और जांच के आदेश दिए हैं। आशंका जताई जा रही है कि इस चोरी के पीछे एक बहुत बड़ा संगठित गिरोह काम कर रहा है जिसके पास पटरियां काटने के लिए भारी उपकरण और ले जाने के लिए बड़े वाहन मौजूद हैं। उरगा से लेकर पेंड्रा तक फैले इस रेल कॉरिडोर में सुरक्षा व्यवस्था की कमी का फायदा उठाकर चोर रात के सन्नाटे में वारदात को अंजाम दे रहे हैं और कीमती रेल सामग्री को कबाड़ के दाम पर खपा रहे हैं।
ब्रिज चोरी मामले में दस आरोपी गिरफ्तार लेकिन पांच अब भी फरार और पुलिस की पकड़ से बाहर
कोरबा में लोहे की चोरी का यह कोई पहला मामला नहीं है क्योंकि सत्रह जनवरी को भी ढोढ़ीपारा इलाके में स्थित एक चालीस साल पुराने लोहे के पुल की अस्सी फुट लंबी रेलिंग को चोर गैस कटर से काटकर ले गए थे। उस मामले में पुलिस ने दस आरोपियों को गिरफ्तार तो कर लिया है लेकिन गिरोह के पांच मुख्य सदस्य अब भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं। पुल चोरी होने के बाद से स्थानीय नागरिकों का आवागमन बंद हो गया है और अब रेल पटरी की चोरी ने जिले की कानून व्यवस्था और पुलिस की गश्त पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।