सुप्रीम कोर्ट के निर्णय और 10% ग्लोबल टैरिफ के बावजूद समझौते में बदलाव नहीं; फरवरी अंत तक अंतरिम करार, अप्रैल से लागू होने की तैयारी
अमेरिका में टैरिफ को लेकर कानूनी उठापटक के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने स्पष्ट किया है कि भारत के साथ प्रस्तावित व्यापार समझौते पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच पहले से तय शर्तों के आधार पर ही बातचीत आगे बढ़ेगी।
वॉशिंगटन/नई दिल्ली (ए)। अमेरिका में टैरिफ को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले और उसके कुछ ही घंटों बाद नए वैश्विक शुल्क के ऐलान से वैश्विक व्यापार जगत में हलचल मच गई है। इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने स्पष्ट किया कि भारत के साथ प्रस्तावित ट्रेड डील पर इन फैसलों का कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा। समझौता पूर्व निर्धारित ढांचे के अनुसार ही आगे बढ़ेगा।
शुक्रवार को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा टैरिफ निरस्त करने के निर्णय के लगभग तीन घंटे बाद ट्रम्प ने विश्व के कई देशों पर 10% का ग्लोबल टैरिफ लागू करने की घोषणा कर दी। भारत के साथ जारी व्यापार वार्ता में यह 10% अतिरिक्त शुल्क शामिल होगा या पहले से प्रस्तावित 18% दर में समायोजित किया जाएगा, इस पर राष्ट्रपति ने सीधा जवाब नहीं दिया।
हालांकि, BBC की एक रिपोर्ट के अनुसार व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने संकेत दिया है कि ब्रिटेन, भारत और यूरोपीय संघ जैसे देशों को अब धारा 122 के तहत 10% वैश्विक टैरिफ का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में भारत पर कुल प्रभावी टैरिफ दर घटकर 10% रह सकती है, जो पहले प्रस्तावित 18% से कम है।
इधर, भारत में केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि अमेरिका के साथ अंतरिम व्यापार समझौता फरवरी के अंत तक अंतिम रूप ले लेगा। मार्च में इस पर हस्ताक्षर किए जाने और अप्रैल से इसे लागू करने की तैयारी है।
सूत्रों के मुताबिक, 23 फरवरी से भारतीय और अमेरिकी अधिकारी अमेरिका में तीन दिवसीय बैठक करेंगे। 7 फरवरी को जारी संयुक्त बयान के आधार पर समझौते का कानूनी मसौदा तैयार किया जाएगा। भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व वाणिज्य मंत्रालय के मुख्य वार्ताकार दर्पण जैन करेंगे।
यदि प्रस्तावित कर कटौती 25% से घटाकर 18% या उससे कम की जाती है, तो भारतीय कपड़ा, चमड़ा और रत्न-आभूषण उद्योग को सीधा लाभ मिल सकता है। आने वाले महीनों में भारत ब्रिटेन और ओमान सहित अन्य देशों के साथ भी मुक्त व्यापार समझौतों को अंतिम रूप देने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।