23 फरवरी से शुरू होगा विधानसभा सत्र; 9 राज्यों के कानूनों के अध्ययन के बाद तैयार हुआ ड्राफ्ट, जबरन धर्म परिवर्तन पर सख्त सजा का प्रावधान
रायपुर में 23 फरवरी से शुरू हो रहे विधानसभा के बजट सत्र में धर्मांतरण संशोधन विधेयक पेश किए जाने की संभावना है। प्रस्तावित मसौदे में धर्म परिवर्तन से 60 दिन पूर्व प्रशासन को सूचना देना अनिवार्य करने और नियमों के उल्लंघन पर कड़ी सजा का प्रावधान शामिल है।
रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा का बजट सत्र 23 फरवरी से प्रारंभ होकर 20 मार्च तक चलेगा। कुल 15 बैठकों वाले इस सत्र में एक हजार से अधिक प्रश्न सूचीबद्ध किए गए हैं, वहीं एक दर्जन से अधिक विधेयक पेश किए जाने की तैयारी है। इनमें धर्मांतरण संशोधन विधेयक को लेकर सबसे अधिक चर्चा है।
सूत्रों के अनुसार, राज्य सरकार ने अन्य 9 राज्यों के प्रचलित कानूनों का अध्ययन करने के बाद नया मसौदा तैयार किया है। प्रस्तावित ड्राफ्ट में किसी भी व्यक्ति को धर्म परिवर्तन से 60 दिन पूर्व जिला प्रशासन को सूचना देना अनिवार्य किया जा सकता है। निर्धारित प्रक्रिया का पालन करने के बाद ही धर्म परिवर्तन मान्य होगा।
सरकार जबरन, प्रलोभन या दबाव में कराए गए धर्म परिवर्तन पर कठोर दंड का प्रावधान करने जा रही है। नियमों का उल्लंघन करने वालों के लिए कारावास और जुर्माने की व्यवस्था प्रस्तावित है। विधेयक निर्माण समिति के सदस्यों का कहना है कि उद्देश्य राज्य में धार्मिक सौहार्द बनाए रखना और विवादों को रोकना है।
बताया जा रहा है कि गृहमंत्री विजय शर्मा के नेतृत्व में 52 बैठकों के बाद मसौदा अंतिम रूप में तैयार किया गया है। राज्य सरकार समानांतर रूप से धार्मिक स्वतंत्रता से संबंधित व्यापक कानून भी लाने की दिशा में काम कर रही है।
बजट सत्र को लेकर सियासी हलचल भी तेज हो गई है। सत्तारूढ़ भाजपा ने 23 फरवरी को विधायक दल की बैठक बुलाई है, जबकि नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत उसी दिन राजीव भवन में कांग्रेस विधायक दल के साथ रणनीति तय करेंगे। संभावना है कि धर्मांतरण विधेयक को लेकर सदन में तीखी बहस देखने को मिले।