64 हजार युवाओं ने कराया था पंजीयन, लेकिन कम सैलरी और दूसरे राज्यों में पोस्टिंग की शर्त ने तोड़ी उम्मीदें
रायपुर (ए) : रायपुर के गवर्नमेंट इंजीनियरिंग कॉलेज में आयोजित तीन दिवसीय राज्य स्तरीय रोजगार मेला छत्तीसगढ़ के युवाओं के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं रहा। जहाँ एक ओर हजारों की संख्या में युवा आँखों में भविष्य के सपने लेकर पहुँचे थे, वहीं हकीकत में यह मेला महज एक ‘रिज्यूम जमा केंद्र’ बनकर सिमट गया। आंकड़ों के मुताबिक, लक्ष्य के मुकाबले केवल 1,816 युवाओं को ही रोजगार मिल पाया, जबकि 56,000 से ज्यादा पंजीकृत युवाओं ने मेले से दूरी बनाए रखी।
रिज्यूम लेकर युवाओं को किया गया टालमटोल
मेले में आए युवाओं ने कंपनियों पर केवल औपचारिकता पूरी करने का आरोप लगाया। अभ्यर्थियों का कहना है कि अधिकांश कंपनियों ने इंटरव्यू लेने के बजाय सिर्फ रिज्यूम हाथ में थमा देने को कहा। रायपुर और जांजगीर-चांपा से आए युवाओं ने नाराजगी जताते हुए कहा कि जब उनका डेटा पहले से रोजगार कार्यालय में मौजूद है, तो उन्हें यहाँ सिर्फ कागज जमा करने के लिए क्यों बुलाया गया? उन्हें उम्मीद थी कि यहाँ सीधे जॉब लेटर मिलेगा, लेकिन उन्हें “बाद में फोन करेंगे” कहकर घर भेज दिया गया।
वेतन में भारी कटौती: 18 हजार वाले को मिला 14 हजार का ऑफर
रोजगार मेले में सैलरी पैकेज को लेकर सबसे ज्यादा विवाद की स्थिति रही। बेमेतरा के बलदाऊ साहू जैसे अनुभवी युवाओं ने बताया कि वे पहले से ही 18,000 रुपये कमा रहे हैं, लेकिन मेले में उन्हें केवल 14,000 रुपये का ऑफर दिया गया। 8-10 साल का अनुभव रखने वाले युवाओं को भी फ्रेशर की तरह आंका गया। कई युवाओं ने कहा कि इतनी कम सैलरी में शहर का किराया और खाने का खर्च निकालना भी संभव नहीं है, जिससे यह मेला उनके लिए बेमतलब साबित हुआ।
स्थानीय रोजगार की कमी और बाहरी राज्यों का पलायन
युवाओं की नाराजगी की एक बड़ी वजह छत्तीसगढ़ से बाहर की पोस्टिंग भी रही। सोलर प्लेट और मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र की कंपनियों ने हरियाणा, ओडिशा और विशाखापट्टनम जैसे राज्यों में काम करने की शर्त रखी। बालोद और पाटन से आई युवतियों ने बताया कि छत्तीसगढ़ में प्लांट कम होने का खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ रहा है। कम वेतन पर घर से सैकड़ों किलोमीटर दूर जाकर काम करना किसी भी युवा के लिए व्यावहारिक नहीं लग रहा है।
प्रशासन का तर्क: अभी चयन प्रक्रिया है बाकी
भले ही ग्राउंड जीरो पर युवाओं में भारी गुस्सा देखा गया, लेकिन रोजगार विभाग के अधिकारियों का मानना है कि मेला पूरी तरह विफल नहीं रहा। उपसंचालक ए. ओ. लॉरी के अनुसार, कई युवाओं का प्राथमिक स्तर पर चयन हुआ है। कंपनियां अब अपने स्तर पर शॉर्टलिस्ट किए गए युवाओं को कॉल करेंगी। हालांकि, विभाग के इस तर्क से वे युवा संतुष्ट नजर नहीं आए जो दूर-दराज के जिलों से किराया खर्च करके इस उम्मीद में आए थे कि उनके हाथों में रोजगार होगा।