6वीं-7वीं के छात्रों का कमाल: दिल्ली में 2100 स्कूलों को पछाड़कर जोनल विजेता रायपुर ने नेशनल लेवल पर लहराया परचम
रायपुर (ए) : रायपुर के एक निजी स्कूल के छात्रों ने अपनी प्रतिभा और अनुशासन के दम पर राष्ट्रीय स्तर पर छत्तीसगढ़ का मान बढ़ाया है। भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय और स्कूली शिक्षा मंत्रालय द्वारा नई दिल्ली में आयोजित ‘राष्ट्रीय विद्यालय बैंड प्रतियोगिता 2025–26’ में रायपुर की टीम ने तृतीय पुरस्कार जीतकर इतिहास रच दिया। इस प्रतियोगिता में देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लगभग 2100 स्कूलों ने हिस्सा लिया था, जिनमें से कड़ी चयन प्रक्रिया के बाद केवल 16 स्कूलों को नेशनल स्टेज तक पहुँचने का मौका मिला।
जोनल से नेशनल तक का ऐतिहासिक सफर
रायपुर की इस बैंड टीम ने दिल्ली पहुँचने से पहले ही अपनी श्रेष्ठता साबित कर दी थी। राष्ट्रीय स्तर के लिए क्वालीफाई करने से पहले स्कूल की टीम ने हैदराबाद में आयोजित जोनल स्तर की प्रतियोगिता में प्रथम स्थान हासिल किया था। छोटे बच्चों के इस दल ने न केवल रायपुर बल्कि पूरे जोन का प्रतिनिधित्व करते हुए अपनी जगह पक्की की और अंततः नेशनल फाइनल में अपनी चमक बिखेरी।
कक्षा 6वीं और 7वीं के नन्हे जांबाजों का दम
प्रतियोगिता की सबसे खास बात यह रही कि रायपुर की टीम में शामिल कैडेट्स कक्षा 6वीं और 7वीं के छात्र थे। इतनी छोटी उम्र के बावजूद इन बच्चों ने मैदान पर जो अनुशासन, सटीक कदमताल और संगीतात्मक कौशल दिखाया, उसने निर्णायकों को हैरान कर दिया। दर्शकों और जजों ने इन नन्हे कैडेट्स के आपसी तालमेल और टीमवर्क की जमकर सराहना की और इसे भविष्य के अनुशासित युवाओं का एक बेहतरीन उदाहरण बताया।
अनुशासन और सामंजस्य ने दिलाई सफलता
राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा बहुत कठिन थी, जहाँ देश के सबसे बेहतरीन बैंड्स के बीच मुकाबला था। रायपुर के छात्रों ने अपनी वादन शैली (Playing Style) और सामूहिक सामंजस्य (Collective Coordination) के जरिए निर्णायक मंडल को प्रभावित किया। मुख्य अतिथि ने भी अपने संबोधन में छात्रों की कड़ी मेहनत और समर्पण की प्रशंसा करते हुए कहा कि इन बच्चों ने न केवल संगीत सीखा है, बल्कि अनुशासन और प्रतिबद्धता की मिसाल पेश की है।
विद्यालय में खुशी का माहौल और उज्ज्वल भविष्य
इस शानदार उपलब्धि पर विद्यालय के संस्थापक आचार्य सुरेंद्र प्रताप सिंह ने अपार हर्ष जताया है। उन्होंने इस सफलता का श्रेय छात्रों की दिन-रात की मेहनत, प्रशिक्षकों के बेहतरीन मार्गदर्शन और अभिभावकों के अटूट सहयोग को दिया। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि बच्चों के आत्मविश्वास को बढ़ाएगी और उन्हें भविष्य में और भी बड़ी चुनौतियों के लिए तैयार करेगी।