पाकिस्तान ने सात आतंकी कैंप निशाना बनाने की बात कही; अफगान पक्ष ने नागरिकों के हताहत होने का आरोप लगाया, क्षेत्र में तनाव बढ़ा
पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच तनाव एक बार फिर खुलकर सामने आ गया है। पाकिस्तानी सेना ने रविवार तड़के अफगानिस्तान के सीमावर्ती इलाकों में हवाई हमले किए। इस्लामाबाद ने इसे आतंकवादी ठिकानों के खिलाफ ‘इंटेलिजेंस आधारित ऑपरेशन’ बताया है, जबकि अफगान सूत्रों का दावा है कि हमलों में एक ही परिवार के कई लोग मारे गए। दोनों देशों के बीच आरोप-प्रत्यारोप के बीच हालात संवेदनशील बने हुए हैं।
इस्लामाबाद (ए)। पाकिस्तानी सेना ने अफगानिस्तान के पूर्वी प्रांतों में कथित तौर पर तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) से जुड़े ठिकानों पर एयरस्ट्राइक की है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान का दावा है कि सात आतंकी कैंपों और ठिकानों को निशाना बनाया गया। इस्लामाबाद का कहना है कि हालिया आत्मघाती हमलों के बाद यह जवाबी कार्रवाई की गई।
पाकिस्तान के सूचना मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि यह ‘इंटेलिजेंस बेस्ड ऑपरेशन’ था और इसके लिए ठोस प्रमाण मौजूद हैं कि हमलों की साजिश अफगान जमीन से रची जा रही थी।
नागरिकों की मौत का दावा
अफगान मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, नांगरहार प्रांत में एक रिहायशी घर पर हमला हुआ, जहां एक ही परिवार के कई सदस्य मलबे में दब गए। अमेरिकी मानवाधिकार संगठन International Human Rights Foundation ने 16 लोगों की मौत का दावा किया है, जिनमें महिलाएं और बच्चे शामिल बताए गए हैं। हालांकि, आधिकारिक आंकड़ों की पुष्टि अब तक नहीं हो सकी है।

अफगान रक्षा मंत्रालय ने हमलों को देश की संप्रभुता का उल्लंघन करार देते हुए “उचित समय पर जवाब” देने की चेतावनी दी है। अफगान सूत्रों के मुताबिक पक्तिका में एक धार्मिक स्कूल और नांगरहार में अन्य ठिकानों को भी निशाना बनाया गया।
TTP पर पाकिस्तान का आरोप
पाकिस्तान लंबे समय से आरोप लगाता रहा है कि तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) अफगानिस्तान की जमीन से संचालित हो रहा है। वहीं अफगान तालिबान सरकार इन आरोपों से इनकार करती रही है। इस्लामाबाद ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि वह तालिबान पर दबाव डाले, ताकि अफगान क्षेत्र का उपयोग किसी भी देश के खिलाफ न हो।
दोहा समझौते का हवाला
पाकिस्तान ने 2020 में कतर की राजधानी में हुए दोहा समझौते का भी जिक्र किया, जिसमें तालिबान ने वादा किया था कि अफगानिस्तान की जमीन का इस्तेमाल किसी अन्य देश की सुरक्षा के खिलाफ नहीं होने दिया जाएगा। यह समझौता 29 फरवरी 2020 को अमेरिका और तालिबान के बीच हुआ था, जिसके बाद 2021 में अमेरिकी सेना की वापसी का रास्ता साफ हुआ।
हालिया हमलों की पृष्ठभूमि
एयरस्ट्राइक से पहले खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के बन्नू जिले में सुरक्षा काफिले पर आत्मघाती हमला हुआ था, जिसमें दो सैनिकों की मौत हुई। इससे पहले बाजौर और इस्लामाबाद में भी घातक हमले हो चुके हैं।
पाकिस्तानी अखबार द डॉन के अनुसार, राजधानी में एक शिया मस्जिद पर हुए आत्मघाती हमले में 31 लोगों की जान गई थी, जिसकी जिम्मेदारी इस्लामिक स्टेट ने ली थी।