- कराची में विरोध प्रदर्शन हिंसक, अमेरिकी वाणिज्य दूतावास के बाहर फायरिंग
- जम्मू-कश्मीर के कई जिलों में कर्फ्यू जैसे हालात, श्रीनगर में इंटरनेट सेवा बाधित
- मिडिल-ईस्ट एयरस्पेस बंद, IGI एयरपोर्ट पर यात्री फंसे
- पीएम आवास पर उच्चस्तरीय बैठक, भारतीयों की सुरक्षा पर मंथन
मिडिल-ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर अब दक्षिण एशिया तक दिखाई देने लगा है। ईरान-इजराइल टकराव के बीच पाकिस्तान के कराची में हुए हिंसक प्रदर्शन में 23 लोगों की मौत हो गई, जबकि भारत में भी कई शहरों में विरोध प्रदर्शन के बाद सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। जम्मू-कश्मीर में एहतियातन सख्ती बरती जा रही है और दिल्ली एयरपोर्ट पर मिडिल-ईस्ट जाने वाली उड़ानें रद्द होने से यात्री परेशान हैं।
ईरान और इजराइल के बीच जारी संघर्ष का प्रभाव क्षेत्रीय स्तर पर तेज़ी से फैलता नजर आ रहा है। पाकिस्तान के कराची में स्थित अमेरिकी वाणिज्य दूतावास के बाहर रविवार को खामेनेई की मौत के विरोध में उग्र प्रदर्शन हुआ। प्रदर्शनकारियों ने दूतावास में घुसने की कोशिश की, जिसके बाद अंदर से की गई फायरिंग में अब तक 23 लोगों की मौत हो चुकी है और 10 से अधिक घायल बताए जा रहे हैं। यह प्रदर्शन इमामिया छात्र संगठन के बैनर तले किया गया था।
भारत में भी शिया समुदाय द्वारा विरोध प्रदर्शन किए गए। एहतियात के तौर पर जम्मू-कश्मीर के कई जिलों में कर्फ्यू जैसे हालात हैं। श्रीनगर के लाल चौक पर बैरिकेडिंग कर अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं। हालात को देखते हुए कुछ इलाकों में इंटरनेट सेवाएं भी अस्थायी रूप से बंद कर दी गई हैं।
उधर, मिडिल-ईस्ट के कई देशों का एयरस्पेस बंद होने से हवाई यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ है। नई दिल्ली स्थित इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय (IGI) एयरपोर्ट पर पश्चिम एशिया जाने वाली कई उड़ानें रद्द कर दी गई हैं। रमजान के दौरान मक्का और मदीना की यात्रा की योजना बना रहे यात्रियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। एयरपोर्ट पर बड़ी संख्या में यात्री फंसे हुए हैं।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रधानमंत्री आवास पर रविवार रात करीब 9:30 बजे सुरक्षा मामलों की उच्चस्तरीय बैठक हुई। बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ अनिल चौहान और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण सहित वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
बैठक में पश्चिम एशिया में रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा, संभावित आपात स्थिति से निपटने की रणनीति और भारत की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की गई। वर्तमान में पश्चिम एशिया का अधिकांश एयरस्पेस बंद है, जिससे भारतीयों की वापसी भी चुनौतीपूर्ण हो सकती है।
प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी दी कि उन्होंने संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान और इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से फोन पर बातचीत की। भारत ने यूएई पर हुए हमलों की निंदा करते हुए कठिन समय में उसके साथ खड़े रहने की बात कही है। साथ ही, इजराइल में नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए तनाव कम करने और शांति बहाली पर जोर दिया गया है।
गौरतलब है कि ईरान में करीब 10 हजार भारतीय नागरिक रह रहे हैं, जबकि इजराइल में 40 हजार से अधिक भारतीय निवास करते हैं। इसके अलावा पूरे गल्फ और पश्चिम एशिया क्षेत्र में लगभग 90 लाख भारतीय कामकाज और व्यवसाय से जुड़े हैं। ऐसे में क्षेत्र में बढ़ता तनाव भारत के लिए सामरिक और मानवीय दोनों दृष्टियों से चिंता का विषय बना हुआ है।