- कराची कॉन्सुलेट पर हिंसक प्रदर्शन के बाद 6 मार्च तक अपॉइंटमेंट रद्द
- ईरान पर 1000 से ज्यादा हमले, सैकड़ों नागरिक हताहत
- स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद करने का दावा, वैश्विक तेल सप्लाई पर खतरा
- खाड़ी देशों में 90 लाख भारतीय, हालात पर भारत की नजर
इजराइल-अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध चौथे दिन और अधिक भयावह हो गया है। बढ़ते तनाव का असर अब पाकिस्तान तक पहुंच गया है, जहां कराची स्थित अमेरिकी कॉन्सुलेट पर हमले के बाद अमेरिका ने पूरे पाकिस्तान में वीजा अपॉइंटमेंट अस्थायी रूप से बंद कर दिए हैं। उधर ईरान में अब तक 742 लोगों की मौत की खबर है, जबकि वैश्विक तेल आपूर्ति पर भी संकट के बादल मंडरा रहे हैं।
पाकिस्तान में अमेरिकी वीजा सेवाएं निलंबित
पाकिस्तान में स्थित U.S. Embassy in Pakistan ने सुरक्षा कारणों से इस्लामाबाद, लाहौर और कराची में सभी वीजा अपॉइंटमेंट 6 मार्च तक रद्द कर दिए हैं। रविवार को कराची स्थित अमेरिकी कॉन्सुलेट के बाहर हिंसक प्रदर्शन हुआ। सुरक्षाबलों की फायरिंग में कम से कम 10 लोगों की मौत हो गई। यह विरोध उस खबर के बाद भड़का, जिसमें दावा किया गया था कि ईरान के सर्वोच्च नेता की हमलों में मौत हो गई है।

ट्रम्प की चेतावनी—‘सबसे बड़ा हमला बाकी’
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने मिडिल ईस्ट में रह रहे अमेरिकियों से तुरंत क्षेत्र छोड़ने की अपील की है। व्हाइट हाउस में बयान देते हुए उन्होंने कहा कि ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान 4-5 हफ्ते चल सकता है और जरूरत पड़ने पर इसे और लंबा किया जा सकता है।
ट्रम्प ने संकेत दिया कि “ईरान पर अब तक का सबसे बड़ा हमला अभी बाकी है।”
ईरान में भारी तबाही, 742 मौतें
Al Jazeera की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका और इजराइल ने ईरान के 1000 से ज्यादा ठिकानों को निशाना बनाया है। शुरुआती 30 घंटों में 2000 से अधिक बम गिराए गए।
अब तक 742 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें 176 बच्चे शामिल बताए जा रहे हैं। 750 से अधिक लोग घायल हैं। ईरान में हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद करने का दावा
ईरान की सेना की इकाई Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) ने रणनीतिक समुद्री मार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद करने का दावा किया है।
यह मार्ग वैश्विक तेल परिवहन के लिए बेहद अहम है। भारत का लगभग 50% कच्चा तेल इसी रास्ते से आता है। यदि यह मार्ग बाधित होता है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में तेज उछाल आ सकता है।

खाड़ी देशों में 90 लाख भारतीय
2024 तक खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) देशों—सऊदी अरब, UAE, कतर, कुवैत, ओमान और बहरीन—में 90 लाख से ज्यादा भारतीय रह रहे थे।
Embassy of India, Abu Dhabi के अनुसार, UAE में करीब 43 लाख भारतीय निवास करते हैं, जो वहां की कुल आबादी का लगभग 35% हैं।
ये प्रवासी इंफ्रास्ट्रक्चर, हेल्थ, रिटेल, इंजीनियरिंग और फाइनेंस जैसे क्षेत्रों में कार्यरत हैं और भारत को बड़ी मात्रा में रेमिटेंस भेजते हैं। मौजूदा हालात को देखते हुए उनकी सुरक्षा भी एक अहम मुद्दा बन गई है।
वैश्विक असर की आशंका
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि संघर्ष लंबा खिंचता है तो इसका असर केवल मिडिल ईस्ट तक सीमित नहीं रहेगा। तेल की कीमतें, वैश्विक बाजार और दक्षिण एशिया की सुरक्षा स्थिति भी प्रभावित हो सकती है। युद्ध की यह आग अब क्षेत्रीय सीमाओं से निकलकर अंतरराष्ट्रीय चिंता का विषय बन चुकी है।