निर्माण के दौरान ही फील्ड में जाकर निरीक्षण करने के निर्देश, समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण काम सुनिश्चित करने पर जोर
प्रदेश में सड़क निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और समयसीमा को लेकर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि निर्माण कार्य में किसी भी तरह की लापरवाही या घटिया गुणवत्ता पाए जाने पर जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई होगी और दोषी ठेकेदारों को ब्लैकलिस्ट किया जाएगा।
रायपुर। प्रदेश में सड़क निर्माण कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सख्त रुख अपनाया है। मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित लोक निर्माण विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि निर्माण कार्यों की निगरानी केवल कागजों पर नहीं बल्कि फील्ड में जाकर नियमित रूप से की जाए। उन्होंने कहा कि निर्माण पूरा होने के बाद निरीक्षण करने के बजाय कार्य के दौरान ही गुणवत्ता पर नजर रखना जरूरी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सड़कें आमजन की दैनिक जिंदगी से जुड़ी बुनियादी सुविधा हैं और उनकी गुणवत्ता से सरकार की कार्यप्रणाली की छवि भी बनती है। यदि नई बनी सड़कें कुछ वर्षों में ही खराब हो जाती हैं तो यह गंभीर चिंता का विषय है। इसलिए निर्माण कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही को बिल्कुल भी स्वीकार नहीं किया जाएगा।
बैठक में बागबहार–कोतबा सड़क की खराब स्थिति पर मुख्यमंत्री ने नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि कुछ वर्ष पहले बनी सड़क का इतनी जल्दी खराब होना उचित नहीं है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि इस मामले की गंभीरता से जांच कर जिम्मेदारों पर कार्रवाई की जाए और भविष्य में ऐसी स्थिति से बचने के लिए निर्माण के दौरान ही सख्त गुणवत्ता नियंत्रण किया जाए।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि प्रदेश में कई महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं पर काम चल रहा है, लेकिन इनकी जानकारी आमजन तक पर्याप्त रूप से नहीं पहुंच पाती। उन्होंने निर्देश दिए कि बड़ी परियोजनाओं के शिलान्यास और भूमिपूजन जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में कराए जाएं ताकि लोगों को विकास कार्यों की जानकारी मिल सके।
समीक्षा बैठक में टेंडर प्रक्रिया को समयबद्ध बनाने पर भी जोर दिया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि कई ठेकेदार कम दर पर टेंडर हासिल कर लेते हैं, जिसके कारण काम की गुणवत्ता और समयसीमा प्रभावित होती है। ऐसी स्थिति में ठेकेदारों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए और उन्हें निर्धारित मानकों के अनुरूप कार्य पूरा करना होगा।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए कि निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और समयबद्धता सुनिश्चित करने के लिए स्पष्ट नियमावली तैयार की जाए। अन्य राज्यों की बेहतर व्यवस्थाओं का अध्ययन कर उन्हें प्रदेश में लागू करने पर भी विचार करने को कहा गया। साथ ही टेंडर और डीपीआर जैसे तकनीकी कार्यों के लिए अलग इकाई बनाने की संभावना पर भी चर्चा की गई।
बैठक में यह जानकारी भी दी गई कि प्रदेश में करीब 300 ऐसे गांव चिन्हित किए गए हैं जहां बरसात के दौरान सड़क संपर्क टूट जाता है। मुख्यमंत्री ने इन गांवों को प्राथमिकता के आधार पर सड़कों और पुल-पुलियों से जोड़ने के निर्देश दिए।
इसके अलावा कई प्रमुख सड़क परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई, जिनमें मनेंद्रगढ़–सूरजपुर–अंबिकापुर–पत्थलगांव–कुनकुरी–जशपुर–झारखंड सीमा राष्ट्रीय राजमार्ग, अंबिकापुर–सेमरसोत–रामानुजगंज–गढ़वा मार्ग, गीदम–दंतेवाड़ा मार्ग, चांपा–सक्ती–रायगढ़–ओडिशा सीमा मार्ग और रायपुर–दुर्ग मार्ग सहित अन्य परियोजनाएं शामिल हैं। बस्तर क्षेत्र में पुल-पुलिया निर्माण और 17 सड़कों के उन्नयन कार्यों पर भी चर्चा की गई।
भवन निर्माण कार्यों की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि शासकीय भवनों के डिजाइन को आधुनिक बनाया जाना चाहिए। उन्होंने भूमि के बेहतर उपयोग के लिए क्षैतिज के बजाय ऊर्ध्वाधर निर्माण को बढ़ावा देने और राजभवन में बन रहे गेस्ट हाउस को आधुनिक स्वरूप में तैयार करने के निर्देश भी दिए।
मुख्यमंत्री ने अंत में कहा कि सड़कें लोगों के जीवन से सीधे जुड़ी होती हैं और उनकी गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है। उन्होंने अधिकारियों को ऐसा तंत्र विकसित करने के निर्देश दिए, जिससे सड़कों में बनने वाले गड्ढों की जानकारी समय पर मिल सके और उनका शीघ्र मरम्मत कार्य किया जा सके।