निफ्टी में भी 500 अंकों की कमजोरी, कच्चा तेल 116 डॉलर के पार; डॉलर के मुकाबले रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर
मध्य-पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर भारतीय शेयर बाजार पर भी साफ दिखाई दिया। निवेशकों की सतर्कता और वैश्विक बाजारों में कमजोरी के बीच सोमवार को सेंसेक्स और निफ्टी में बड़ी गिरावट दर्ज की गई, वहीं कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल और रुपये में कमजोरी देखने को मिली।
मुंबई (ए)। मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव और वैश्विक बाजारों में बिकवाली के असर से सोमवार को घरेलू शेयर बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई। कारोबार के दौरान सेंसेक्स करीब 1700 अंक टूटकर 77,200 के स्तर के आसपास पहुंच गया, जबकि निफ्टी में भी लगभग 500 अंकों की गिरावट दर्ज की गई और यह 23,500 के करीब कारोबार करता रहा।
बाजार में सबसे ज्यादा दबाव बैंकिंग, ऑटो, मेटल, एनर्जी और एफएमसीजी सेक्टर के शेयरों में देखा गया। सुबह करीब 11 बजे तक सेंसेक्स के 30 में से 29 शेयर लाल निशान में कारोबार करते नजर आए, जिससे निवेशकों में सतर्कता का माहौल बना रहा।
विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव से सप्लाई चेन प्रभावित होने और महंगाई बढ़ने की आशंका रहती है। ऐसी स्थिति में निवेशक जोखिम से बचने के लिए शेयर बाजार से पूंजी निकालकर सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख करने लगते हैं, जिससे बाजार में गिरावट का दबाव बढ़ जाता है।
कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल
अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमतों में तेज उछाल देखा गया है। यह 25 प्रतिशत से अधिक बढ़कर लगभग 116 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया है। पिछले करीब 10 दिनों में कच्चे तेल की कीमतों में लगभग 60 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इससे पहले वर्ष 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार गई थीं।
विश्लेषकों का मानना है कि यदि वैश्विक तनाव बना रहा तो कच्चे तेल की कीमतें 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं। इसका असर भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर भी पड़ सकता है और ईंधन के दाम 5 से 6 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि सरकार ने देश में पर्याप्त तेल भंडार होने की बात कही है।
रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर
डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया भी कमजोर होकर अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया। कारोबार के दौरान रुपया 46 पैसे गिरकर 92.28 प्रति डॉलर के स्तर पर पहुंच गया। विशेषज्ञों के अनुसार कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और वैश्विक अनिश्चितता के कारण रुपये पर दबाव बढ़ा है।
एशियाई बाजारों में भी उतार-चढ़ाव
वैश्विक स्तर पर भी बाजारों में अस्थिरता का माहौल देखने को मिला। एशियाई बाजारों में कई प्रमुख सूचकांकों में उतार-चढ़ाव दर्ज किया गया, जबकि अमेरिकी बाजार भी पिछले कारोबारी सत्र में गिरावट के साथ बंद हुए थे।
पिछले कारोबारी सत्र में भी दबाव
इससे पहले पिछले कारोबारी सत्र में भी घरेलू शेयर बाजार में गिरावट दर्ज की गई थी। सेंसेक्स करीब 1097 अंक टूटकर 78,919 के स्तर पर बंद हुआ था, जबकि निफ्टी भी 315 अंक गिरकर 24,450 पर आ गया था।
वैश्विक परिस्थितियों और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव को देखते हुए आने वाले दिनों में बाजार की दिशा काफी हद तक अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर निर्भर रहने की संभावना जताई जा रही है।