होर्मुज जलडमरूमध्य में संकट और तेल ठिकानों पर हमलों से सप्लाई पर असर, विशेषज्ञों ने 150 डॉलर प्रति बैरल तक जाने की जताई आशंका
मध्य-पूर्व में बढ़ते सैन्य तनाव का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर दिखाई देने लगा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया है और ब्रेंट क्रूड तीन साल से अधिक समय के उच्च स्तर पर पहुंच गया है, जिससे वैश्विक महंगाई और ईंधन कीमतों को लेकर चिंता बढ़ गई है।
नई दिल्ली (ए)। मध्य-पूर्व में बढ़ते युद्ध जैसे हालात के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखा जा रहा है। ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 25 प्रतिशत बढ़कर 115 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है, जो पिछले लगभग साढ़े तीन वर्षों का उच्चतम स्तर माना जा रहा है। इससे पहले वर्ष 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल के पार गया था।
विश्लेषकों का कहना है कि यदि क्षेत्र में तनाव की स्थिति बनी रहती है तो कच्चे तेल की कीमतें 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं। इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था के साथ भारत में भी पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर पड़ सकता है। अनुमान है कि आने वाले समय में ईंधन के दाम 5 से 6 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ सकते हैं।
होर्मुज जलडमरूमध्य में संकट से बढ़ी चिंता
कच्चे तेल की कीमतों में उछाल की प्रमुख वजह फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ने वाला होर्मुज जलडमरूमध्य माना जा रहा है। लगभग 167 किलोमीटर लंबा यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति का महत्वपूर्ण रास्ता है। मौजूदा तनाव के कारण यह मार्ग असुरक्षित माना जा रहा है और कई तेल टैंकरों ने इस रास्ते से गुजरना बंद कर दिया है।
विश्व के कुल पेट्रोलियम व्यापार का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है। सऊदी अरब, इराक और कुवैत जैसे प्रमुख तेल उत्पादक देश भी अपने निर्यात के लिए इसी मार्ग पर निर्भर हैं। भारत भी अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से आयात करता है।
तेल ठिकानों पर हमलों से उत्पादन प्रभावित
क्षेत्र में तेल उत्पादन से जुड़े ठिकानों पर हमलों की घटनाओं ने भी वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को प्रभावित किया है। हाल के दिनों में कई तेल सुविधाओं और रिफाइनरियों को निशाना बनाए जाने की खबरों के बाद कुछ देशों को अपने उत्पादन में कटौती करनी पड़ी है। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है।
10 दिनों में 60 प्रतिशत तक बढ़े दाम
विशेषज्ञों के अनुसार फरवरी के अंतिम सप्ताह से अब तक लगभग 10 दिनों में कच्चे तेल की कीमतों में करीब 60 प्रतिशत तक की तेजी दर्ज की गई है। ऊर्जा बाजार में इस तेजी ने कई देशों की अर्थव्यवस्था और महंगाई को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
भारत के पास तेल भंडार पर्याप्त
सरकारी सूत्रों के अनुसार देश के पास रणनीतिक और व्यावसायिक भंडार के रूप में पर्याप्त तेल उपलब्ध है। आकलन के मुताबिक यदि आयात में अस्थायी बाधा भी आती है तो मौजूदा भंडार के आधार पर आपूर्ति श्रृंखला कई सप्ताह तक सामान्य रूप से चल सकती है।
रूस से तेल खरीद के विकल्प भी खुले
ऊर्जा आपूर्ति को स्थिर बनाए रखने के लिए भारत को रूस से कच्चा तेल खरीदने के विकल्प भी उपलब्ध हैं। वैश्विक बाजार में संतुलन बनाए रखने के उद्देश्य से कुछ शर्तों के साथ भारतीय रिफाइनरियों को सीमित अवधि के लिए विशेष अनुमति दी गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में मध्य-पूर्व की स्थिति और वैश्विक आपूर्ति की स्थिति के आधार पर कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है, जिसका असर विश्व अर्थव्यवस्था के साथ भारत के ऊर्जा बाजार पर भी पड़ सकता है