डिमोना और देजफुल एयरबेस पर हमलों के बाद रेडिएशन का खतरा गहराया, कई न्यूक्लियर साइट्स पर लगातार हमले
मध्य-पूर्व में जारी संघर्ष अब खतरनाक मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते सैन्य टकराव में परमाणु और सामरिक ठिकानों को निशाना बनाए जाने से वैश्विक स्तर पर चिंता गहरा गई है।
तेहरान/तेल अवीव (ए)। ईरान और इजरायल के बीच जारी सैन्य संघर्ष अब गंभीर रूप लेता जा रहा है। हालिया हमलों में जहां ईरान के देजफुल स्थित वाहदाती एयरबेस को निशाना बनाया गया, वहीं इजरायल के डिमोना परमाणु अनुसंधान केंद्र पर भी हमला होने की खबर है। इन घटनाओं ने संभावित बड़े युद्ध और परमाणु खतरे की आशंकाओं को बढ़ा दिया है।
21 मार्च 2026 को ईरान के खूजिस्तान प्रांत में स्थित देजफुल एयरबेस पर भारी बमबारी की गई। बताया जा रहा है कि सटीक मिसाइल हमलों में गोला-बारूद के बंकरों को निशाना बनाया गया, जिसके बाद वहां भीषण विस्फोटों की श्रृंखला शुरू हो गई। धमाकों के कारण आसमान में धुएं का विशाल गुबार उठा और आग की लपटें दूर-दूर तक दिखाई दीं।
यह एयरबेस ईरान के पुराने एफ-5 टाइगर II लड़ाकू विमानों का प्रमुख ठिकाना रहा है। हमले में कई विमान और गोला-बारूद नष्ट होने की आशंका जताई जा रही है।
दूसरी ओर, इजरायल के दक्षिणी शहर डिमोना स्थित परमाणु अनुसंधान केंद्र पर भी हमले की खबर सामने आई है। यह केंद्र इजरायल के परमाणु कार्यक्रम से जुड़ा प्रमुख प्रतिष्ठान माना जाता है। प्रारंभिक रिपोर्ट्स के मुताबिक यहां मिसाइल या ड्रोन के जरिए हमला किया गया, जिसके बाद क्षेत्र में धुएं और आग देखी गई।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस तरह के हमलों से परमाणु प्रतिष्ठानों को नुकसान पहुंचता है, तो रेडिएशन लीक का गंभीर खतरा उत्पन्न हो सकता है, जो व्यापक क्षेत्र को प्रभावित कर सकता है।
इससे पहले भी ईरान के नतांज, फोर्डो, इस्फहान और पारचिन जैसे महत्वपूर्ण परमाणु स्थलों को निशाना बनाए जाने की खबरें सामने आ चुकी हैं। लगातार हो रहे हमलों ने पूरे क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ा दी है।
हालांकि अभी तक संघर्ष पारंपरिक हथियारों तक सीमित है, लेकिन जिस तरह से संवेदनशील ठिकानों को निशाना बनाया जा रहा है, उससे परमाणु युद्ध की आशंका को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता बढ़ती जा रही है।