1 अप्रैल से लागू होंगे नए नियम, 8 घंटे से कम समय में कैंसिलेशन पर नहीं मिलेगा पैसा
अब ट्रेन छूटने से 30 मिनट पहले तक बदल सकेंगे बोर्डिंग स्टेशन
भारतीय रेलवे ने कन्फर्म टिकटों के कैंसिलेशन नियमों में बड़ा बदलाव करते हुए रिफंड को समय आधारित बना दिया है। इस फैसले का उद्देश्य टिकटों की कालाबाजारी पर रोक लगाना है, साथ ही यात्रियों को कुछ अतिरिक्त सुविधाएं भी दी गई हैं, जिनमें अंतिम समय तक बोर्डिंग स्टेशन बदलने की छूट शामिल है।
नई दिल्ली (ए)। भारतीय रेलवे ने यात्रियों की सुविधा और टिकट दलालों पर नियंत्रण के उद्देश्य से टिकट कैंसिलेशन के नियमों में अहम संशोधन किया है। अब कन्फर्म टिकट रद्द करने पर मिलने वाला रिफंड इस बात पर निर्भर करेगा कि ट्रेन के प्रस्थान में कितना समय बाकी है। रेलवे के नए दिशा-निर्देशों के मुताबिक, यदि कोई यात्री ट्रेन के रवाना होने से 72 घंटे पहले टिकट कैंसिल करता है, तो उसे अधिकतम रिफंड मिलेगा और केवल निर्धारित कैंसिलेशन शुल्क ही काटा जाएगा। वहीं, 72 घंटे से 24 घंटे के बीच टिकट रद्द करने पर कुल किराए का 25 प्रतिशत (न्यूनतम शुल्क के साथ) काटा जाएगा।
अगर यात्री 24 घंटे से 8 घंटे के बीच टिकट कैंसिल करता है, तो उसे 50 प्रतिशत राशि का नुकसान उठाना पड़ेगा। सबसे सख्त प्रावधान यह है कि ट्रेन के प्रस्थान से 8 घंटे से कम समय पहले टिकट रद्द करने पर कोई रिफंड नहीं मिलेगा।
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि यह कदम खासतौर पर उन दलालों पर अंकुश लगाने के लिए उठाया गया है, जो बड़ी संख्या में टिकट बुक कर बाद में उन्हें कैंसिल कर मुनाफा कमाते थे।
इसके अलावा, रेलवे ने यात्रियों को एक बड़ी राहत देते हुए बोर्डिंग स्टेशन बदलने की समय सीमा भी बढ़ा दी है। अब यात्री ट्रेन के निर्धारित समय से 30 मिनट पहले तक अपना बोर्डिंग स्टेशन बदल सकेंगे। पहले यह सुविधा केवल चार्ट तैयार होने से पहले तक ही सीमित थी।
रेलवे के ये संशोधित नियम 1 अप्रैल से 15 अप्रैल 2026 के बीच चरणबद्ध तरीके से लागू किए जाएंगे, जिससे यात्रियों को अधिक लचीलापन और पारदर्शिता मिल सके।