नक्सलवाद के बाद शांति से विकास की ओर बढ़ता बस्तर
छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग को विकास की नई दिशा देने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर ‘बस्तर 2.0’ का विस्तृत विकास खाका प्रस्तुत किया और मानसून के बाद क्षेत्र के दौरे का आमंत्रण दिया। नक्सलवाद से उबर चुके बस्तर में अब बुनियादी ढांचे, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन और रोजगार को गति देने पर जोर है।
नई दिल्ली/रायपुर (ए)। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर बस्तर के समग्र विकास की महत्वाकांक्षी योजना ‘बस्तर 2.0’ का खाका सौंपा। इस दौरान उन्होंने नक्सलवाद पर नियंत्रण और क्षेत्र में स्थापित शांति के लिए केंद्र सरकार के सहयोग पर आभार जताया और प्रधानमंत्री को मानसून के बाद बस्तर दौरे का न्योता दिया।
मुख्यमंत्री ने बताया कि बस्तर अब संघर्ष की पहचान से आगे बढ़कर विकास और संभावनाओं के नए युग में प्रवेश कर चुका है। उन्होंने कहा कि एक दशक पहले प्रधानमंत्री द्वारा देखा गया विकसित बस्तर का सपना अब साकार होता दिख रहा है। शांति बहाली के बाद क्षेत्र में निवेश, रोजगार और आधारभूत सुविधाओं के विस्तार का मार्ग प्रशस्त हुआ है।
प्रस्तुत ब्लूप्रिंट ‘सैचुरेशन, कनेक्ट, फैसिलिटेट, एम्पावर और एंगेज’ की रणनीति पर आधारित है, जिसके तहत बस्तर के दूरस्थ गांवों तक सड़क, बिजली और बुनियादी सुविधाएं पहुंचाने का लक्ष्य तय किया गया है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अधूरे कार्यों को वर्ष 2027 तक पूरा करने के साथ 228 नई सड़कों और 267 पुलों के निर्माण का प्रस्ताव रखा गया है।
इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूती देने के लिए रेल, सड़क और हवाई संपर्क का विस्तार किया जा रहा है। रावघाट-जगदलपुर रेल लाइन, जगदलपुर एयरपोर्ट विस्तार और इंद्रावती नदी पर बैराज निर्माण जैसी परियोजनाएं क्षेत्र की कनेक्टिविटी को नई दिशा देंगी। साथ ही 61 नई परियोजनाओं के लिए विशेष केंद्रीय सहायता की मांग भी की गई है।
शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी व्यापक सुधार की योजना है। 45 पोटा केबिन स्कूलों को स्थायी भवनों में बदला जाएगा, सुपर स्पेशलिटी अस्पताल और नए मेडिकल कॉलेज स्थापित किए जाएंगे। ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों का विस्तार और डॉक्टरों के लिए ट्रांजिट हॉस्टल बनाए जा रहे हैं।
कृषि और सिंचाई को सशक्त बनाने के लिए इंद्रावती नदी पर देउरगांव और मटनार में परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं, जिनसे 31,840 हेक्टेयर भूमि को सिंचाई सुविधा मिलेगी। इससे क्षेत्र की कृषि अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।
आजीविका बढ़ाने के लिए सरकार ने तीन वर्षीय योजना तैयार की है, जिसके तहत 2029 तक 85% परिवारों की मासिक आय 15 हजार रुपये से बढ़ाकर 30 हजार रुपये करने का लक्ष्य रखा गया है। ‘नियद नेल्ला नार 2.0’ योजना का विस्तार करते हुए इसे नए जिलों तक पहुंचाया जा रहा है, ताकि विकास का लाभ अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचे।
युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए स्टार्टअप नीति के तहत 2030 तक 5 हजार स्टार्टअप तैयार करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। अब तक एक लाख से अधिक युवाओं को कौशल प्रशिक्षण दिया जा चुका है, जिनमें से 40 हजार को रोजगार भी मिला है।
पर्यटन क्षेत्र में बस्तर को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में भी तेजी से काम हो रहा है। चित्रकोट और तीरथगढ़ जलप्रपात, कांगेर घाटी नेशनल पार्क, एडवेंचर टूरिज्म, कैनोपी वॉक और ग्लास ब्रिज जैसी परियोजनाएं विकसित की जा रही हैं। बस्तर ओलंपिक और बस्तर पंडुम जैसे आयोजन क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत कर रहे हैं।
नक्सलवाद मुक्त बस्तर में शासन की योजनाओं को सीधे लोगों तक पहुंचाने के लिए ‘बस्तर मुन्ने’ कार्यक्रम शुरू किया जा रहा है। इसके तहत ग्राम पंचायत स्तर पर शिविर लगाकर मौके पर ही दस्तावेज तैयार किए जाएंगे और समस्याओं का समाधान किया जाएगा।
प्रधानमंत्री के प्रस्तावित दौरे के दौरान जिन प्रमुख परियोजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण प्रस्तावित है, उनमें दंतेवाड़ा मेडिकल कॉलेज, एजुकेशन सिटी, सुपर स्पेशलिटी अस्पताल और अन्य आधारभूत परियोजनाएं शामिल हैं। इन पहलों से बस्तर को शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के क्षेत्र में नई ऊंचाई मिलने की उम्मीद है।