2029 से 33% आरक्षण का प्रस्ताव; सीटें 543 से बढ़ाकर 850 करने की तैयारी, अखिलेश-शाह के बीच तीखी बहस
संसद के विशेष सत्र के पहले दिन महिला आरक्षण कानून में संशोधन से जुड़े तीन अहम बिल लोकसभा में पेश किए गए। प्रस्तावित बिल में 2029 से लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं को 33% आरक्षण देने की बात है। हालांकि, मुस्लिम महिलाओं को आरक्षण देने के मुद्दे पर सदन में तीखी बहस देखने को मिली।
नई दिल्ली (ए)। संसद के विशेष सत्र की शुरुआत महिला आरक्षण को लेकर जोरदार राजनीतिक टकराव के साथ हुई। केंद्र सरकार ने लोकसभा में संविधान संशोधन सहित तीन महत्वपूर्ण बिल पेश किए, जिनमें महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने और लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने का प्रस्ताव शामिल है।
प्रस्ताव के अनुसार, लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों को बढ़ाकर 850 करने की योजना है। इनमें से 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। राज्यों को 815 और केंद्र शासित प्रदेशों को 35 सीटें देने का प्रस्ताव रखा गया है। इसके लिए परिसीमन की प्रक्रिया भी अपनाई जाएगी।
मुस्लिम महिलाओं को लेकर टकराव
बहस के दौरान समाजवादी पार्टी के सांसद धर्मेंद्र यादव ने सरकार पर संविधान विरोधी कदम उठाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जब तक मुस्लिम महिलाओं को आरक्षण नहीं मिलेगा, तब तक इस कानून का कोई मतलब नहीं है।
इस पर गृह मंत्री अमित शाह ने स्पष्ट कहा कि धर्म के आधार पर आरक्षण असंवैधानिक है और ऐसा कोई प्रावधान संभव नहीं है।
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भी मुद्दा उठाते हुए कहा कि देश की आधी आबादी को आरक्षण मिलना चाहिए, लेकिन मुस्लिम महिलाओं के लिए क्या व्यवस्था होगी। इस पर अमित शाह ने पलटवार करते हुए कहा कि यदि समाजवादी पार्टी चाहे तो अपने टिकट मुस्लिम महिलाओं को दे सकती है।
जनगणना और जातीय गणना पर भी बहस
अखिलेश यादव ने जनगणना में देरी पर सवाल उठाया, जिस पर अमित शाह ने जवाब दिया कि जनगणना की प्रक्रिया जारी है और सरकार जातीय जनगणना का भी निर्णय ले चुकी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि फिलहाल घरों की गिनती हो रही है, जबकि बाद में व्यक्तियों की जाति की गणना की जाएगी।
विपक्ष का विरोध
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने विपक्षी दलों की बैठक के बाद कहा कि विपक्ष महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं है, लेकिन लोकसभा सीटों में वृद्धि का विरोध करेगा। उन्होंने संकेत दिया कि विपक्ष इस मुद्दे पर संसद में विरोध दर्ज कराएगा।
सरकार का रुख
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विशेष सत्र को नारी सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया। उन्होंने कहा कि यह पहल देश की माताओं और बहनों को सम्मान और अधिकार देने की दिशा में महत्वपूर्ण है।
वहीं भाजपा सांसद रवि किशन ने इसे हर भारतीय महिला का सपना बताया और कहा कि यह कानून महिलाओं की आवाज को सशक्त करेगा।
लंबी चर्चा तय
लोकसभा में इन विधेयकों पर 18 घंटे और राज्यसभा में 10 घंटे चर्चा का समय निर्धारित किया गया है। सरकार की ओर से कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल बहस की शुरुआत करेंगे, जबकि भाजपा की ओर से कई प्रमुख नेता चर्चा में भाग लेंगे।