लॉटरी से चयनित छात्रों को प्रवेश देने से किया इंकार
छत्तीसगढ़ में RTE (Right to Education) के तहत प्रवेश को लेकर निजी स्कूलों और सरकार के बीच टकराव गहरा गया है। प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन के आह्वान पर प्रदेशभर के स्कूलों ने असहयोग आंदोलन तेज करते हुए अब RTE के तहत चयनित विद्यार्थियों को प्रवेश देने से इनकार कर दिया है।
रायपुर। रायपुर सहित पूरे छत्तीसगढ़ में निजी स्कूलों का विरोध अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन के नेतृत्व में संचालित असहयोग आंदोलन के तहत स्कूलों ने RTE के अंतर्गत होने वाले एडमिशन पर रोक लगा दी है।
संगठन के मुताबिक, 4 अप्रैल को हुई बैठक में यह निर्णय लिया गया कि लॉटरी के माध्यम से चयनित वंचित वर्ग के विद्यार्थियों को फिलहाल प्रवेश नहीं दिया जाएगा। इसके पहले 17 अप्रैल को शिक्षकों और संचालकों ने काली पट्टी बांधकर विरोध दर्ज कराया था, जबकि 18 अप्रैल को कई स्कूलों में ताला लगाकर बंद रखा गया।
आंदोलन के अगले चरण में आज विभिन्न जिलों के निजी स्कूलों ने डाक के जरिए स्कूल शिक्षा मंत्री को ज्ञापन भेजकर अपनी मांगें दोहराईं। संगठन का आरोप है कि शिक्षा विभाग उनकी समस्याओं को नजरअंदाज कर रहा है और लगातार संवाद के बावजूद कोई ठोस समाधान नहीं निकल रहा।
संगठन ने यह भी बताया कि 24 अप्रैल को प्रदेशभर में जनप्रतिनिधियों से मुलाकात कर उन्हें स्थिति से अवगत कराया जाएगा। इसके लिए जिला स्तर पर रणनीति तैयार कर ली गई है।
इधर, 23 अप्रैल को हुई सचिव स्तरीय वार्ता भी बेनतीजा रही, जिससे स्कूल संचालकों में नाराजगी और बढ़ गई है। उन्होंने साफ किया है कि मांगें पूरी नहीं होने तक आंदोलन जारी रहेगा और आवश्यकता पड़ने पर इसे और उग्र रूप दिया जाएगा।
निजी स्कूलों की प्रमुख मांगों में शासकीय स्कूलों में प्रति विद्यार्थी होने वाले खर्च को सार्वजनिक करना शामिल है, ताकि उसी आधार पर उन्हें मिलने वाली प्रतिपूर्ति राशि तय की जा सके। एसोसिएशन का कहना है कि वर्ष 2011 के बाद से इस राशि का पुनर्निर्धारण नहीं किया गया है, जिससे स्कूलों पर आर्थिक दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है।