गिरफ्तारियां घटीं लेकिन जांच और जब्ती तेज; पीड़ितों को 32 हजार करोड़ लौटाकर एजेंसी ने दी बड़ी राहत
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में मनी लॉन्ड्रिंग के खिलाफ कार्रवाई तेज करते हुए संपत्ति कुर्की के मामले में नया रिकॉर्ड कायम किया है। एजेंसी ने 81 हजार करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति जब्त कर अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई दर्ज की है।
नई दिल्ली (ए)। धनशोधन के मामलों में केंद्रीय जांच एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बीते वित्तीय वर्ष 2025-26 में अभूतपूर्व कार्रवाई करते हुए नया कीर्तिमान स्थापित किया है। एजेंसी ने इस अवधि में 81,422 करोड़ रुपये की संपत्तियां कुर्क कीं, जो पिछले वर्ष के मुकाबले 171 प्रतिशत अधिक है। यह अब तक की सबसे बड़ी जब्ती कार्रवाई मानी जा रही है।
धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत ईडी ने देशभर में छापेमारी और जांच की रफ्तार तेज कर दी है। आंकड़ों के अनुसार, वर्ष के दौरान छापों की संख्या बढ़कर 2,892 हो गई, जबकि एक साल पहले यह 1,491 थी। वहीं, ईसीआईआर (ECIR) दर्ज करने में भी 39 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई और कुल 1,080 मामले दर्ज किए गए। जांच की इस गति का असर अदालतों में दाखिल आरोप पत्रों पर भी दिखा, जहां 812 चार्जशीट पेश की गईं, जो पिछले वर्ष 457 थीं।
हालांकि, गिरफ्तारी के मामलों में कमी देखी गई है। वर्ष 2025-26 में कुल 156 गिरफ्तारियां हुईं, जो पिछले वर्षों की तुलना में करीब 27 प्रतिशत कम हैं। अधिकारियों के अनुसार, एजेंसी अब ठोस साक्ष्यों के आधार पर ‘लक्षित कार्रवाई’ की रणनीति अपना रही है, ताकि मामलों में कानूनी मजबूती बनी रहे। PMLA के तहत जमानत के सख्त प्रावधानों को देखते हुए ईडी बिना पुख्ता सबूत के गिरफ्तारी से बच रही है।
ईडी की कार्रवाई का एक अहम पहलू पीड़ितों को राहत पहुंचाना भी रहा है। एजेंसी ने इस दौरान 32,678 करोड़ रुपये की संपत्ति असली हकदारों को वापस दिलाई, जो तय लक्ष्य से कहीं अधिक है। अधिकारियों का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य आर्थिक अपराधों से प्रभावित लोगों को न्याय दिलाना और अवैध कमाई पर रोक लगाना है।