पेट्रोल ₹105 के पार, डीजल भी महंगा; बढ़ती कीमतों से ट्रांसपोर्ट, खेती और घरेलू बजट पर बढ़ेगा असर
राजधानी रायपुर समेत पूरे प्रदेश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में एक बार फिर इजाफा होने से आम लोगों की चिंता बढ़ गई है। तेल कंपनियों ने शनिवार को पेट्रोल 87 पैसे और डीजल 91 पैसे प्रति लीटर महंगा कर दिया। लगातार नौ दिनों में तीसरी बार हुई बढ़ोतरी से परिवहन, खेती-किसानी और रोजमर्रा की जरूरतों पर महंगाई का असर और गहरा होने की आशंका है।
रायपुर में पेट्रोल ₹105 के पार
नई दरों के बाद रायपुर में पेट्रोल की कीमत बढ़कर लगभग ₹105.19 प्रति लीटर पहुंच गई है, जबकि डीजल करीब ₹98.29 प्रति लीटर बिक रहा है। वहीं सरगुजा में पेट्रोल ₹106.52 और डीजल ₹99.68 प्रति लीटर पहुंच गया है। बिलासपुर में भी पेट्रोल ₹106.05 और डीजल ₹99.16 प्रति लीटर के करीब बिक रहा है।
इससे पहले 15 मई को पेट्रोल-डीजल के दामों में ₹3 प्रति लीटर और 19 मई को करीब 90 पैसे प्रति लीटर की वृद्धि की गई थी।
आम लोगों की जेब पर बढ़ेगा बोझ
डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर सिर्फ वाहन चालकों तक सीमित नहीं रहेगा। मालवाहक वाहनों और ट्रकों का खर्च बढ़ने से फल, सब्जियां, राशन और अन्य जरूरी वस्तुओं के दामों में भी तेजी आ सकती है।
इसके अलावा खेती में इस्तेमाल होने वाले ट्रैक्टर और पंपिंग सेट चलाने की लागत बढ़ने से किसानों पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव पड़ेगा। वहीं बस, ऑटो और स्कूल वाहनों के किराए में भी बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है।
अफवाहों के बीच पेट्रोल पंपों पर लगी थीं कतारें
कीमतों में लगातार बढ़ोतरी और सप्लाई प्रभावित होने की अफवाहों के बीच बीते दिनों रायपुर समेत कई शहरों में पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें देखने को मिली थीं। लोग जरूरत से ज्यादा पेट्रोल-डीजल भरवाते नजर आए, जिससे कुछ जगहों पर पंपों में अव्यवस्था जैसी स्थिति बन गई थी। हालांकि फिलहाल सप्लाई सामान्य बताई जा रही है।
ब्लैक मार्केटिंग रोकने प्रशासन अलर्ट
ईंधन संकट और कालाबाजारी की आशंका को देखते हुए प्रशासन भी सतर्क हो गया है। रायपुर कलेक्टर ने पेट्रोल-डीजल की ब्लैक मार्केटिंग रोकने के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं। अधिक कीमत वसूली या अवैध बिक्री की शिकायत लोग 9977222564, 9977222574, 9977222584 और 9977222594 पर दर्ज करा सकते हैं।
क्यों बढ़ रहे हैं पेट्रोल-डीजल के दाम
विशेषज्ञों के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तेजी इसका मुख्य कारण है। ईरान-अमेरिका तनाव के बाद क्रूड ऑयल की कीमतें 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 100 डॉलर के पार पहुंच गई हैं। इससे तेल कंपनियों पर लागत का दबाव बढ़ा है।
यदि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं तो आने वाले दिनों में पेट्रोल-डीजल और महंगा हो सकता है।
ऐसे तय होती है ईंधन की कीमत
भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। अंतरराष्ट्रीय कीमत, डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति, रिफाइनिंग खर्च, केंद्र सरकार की एक्साइज ड्यूटी, डीलर कमीशन और राज्य सरकार के वैट को जोड़ने के बाद पेट्रोल-डीजल की अंतिम कीमत तय होती है। अलग-अलग राज्यों में टैक्स की दरें अलग होने के कारण हर शहर में ईंधन के रेट भी अलग-अलग होते हैं।