आर्मी चीफ बोले- जरूरत पड़ने पर ‘ऑपरेशन सिंदूर 2.0’ के लिए तीनों सेनाएं 24 घंटे अलर्ट; अगले 2-3 वर्षों में लागू हो सकता है थिएटर कमांड सिस्टम
भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने स्पष्ट किया है कि ऑपरेशन सिंदूर अभी समाप्त नहीं हुआ है और वर्तमान स्थिति केवल संघर्षविराम जैसी है। उन्होंने कहा कि किसी भी संभावित चुनौती का जवाब देने के लिए थल, जल और वायु सेना पूरी तरह तैयार हैं। पुणे स्थित राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एनडीए) की 150वीं पासिंग आउट परेड में उन्होंने भविष्य के युद्ध, तकनीक और सैन्य आधुनिकीकरण पर महत्वपूर्ण विचार रखे।
पुणे/नई दिल्ली (ए)। भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कहा है कि ऑपरेशन सिंदूर ने भारत की सैन्य प्रतिक्रिया की नई परिभाषा तय की है और यह अभियान अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि फिलहाल केवल संघर्षविराम जैसी स्थिति है, लेकिन यदि परिस्थितियां मांग करती हैं तो तीनों सेनाएं ‘ऑपरेशन सिंदूर 2.0’ के लिए चौबीसों घंटे तैयार हैं।

पुणे के खड़कवासला स्थित राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एनडीए) की 150वीं पासिंग आउट परेड को संबोधित करते हुए सेना प्रमुख ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने दुनिया को यह संदेश दिया है कि भारत किसी भी उकसावे का जवाब निर्णायक और प्रभावी ढंग से देने में सक्षम है। उन्होंने नवप्रशिक्षित कैडेट्स से अपने सैन्य जीवन में इसी मानक को बनाए रखने का आह्वान किया।
रिव्यूइंग ऑफिसर के रूप में जनरल द्विवेदी ने 355 कैडेट्स की भव्य परेड की सलामी ली। समारोह के दौरान कैडेट्स ने आकर्षक मार्च पास्ट किया, जबकि फ्लाईपास्ट में सुखोई-30 एमकेआई लड़ाकू विमान, चेतक हेलिकॉप्टर, सारंग एरोबेटिक्स टीम और आकाशगंगा स्काईडाइविंग टीम ने अपनी दक्षता का प्रदर्शन किया। इस बैच में 12 मित्र देशों के 24 कैडेट्स और 18 महिला कैडेट्स भी शामिल रहीं।
सेना प्रमुख ने कहा कि आधुनिक युद्ध अब पूरी तरह तकनीक और सूचना आधारित हो चुका है, जहां हर गतिविधि पर चौबीसों घंटे निगरानी रखी जाती है। ऐसे में सैनिकों की तैनाती, सैन्य अभियानों और सीमावर्ती क्षेत्रों में नागरिकों की सुरक्षा को लेकर अतिरिक्त सतर्कता की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि सूचना युद्ध में सफलता तभी संभव है जब नागरिकों और संस्थाओं के बीच विश्वास मजबूत हो।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ऑटोमेशन की बढ़ती भूमिका का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि तेजी से बदलते युद्ध परिदृश्य में निर्णय क्षमता और संसाधनों के प्रभावी प्रबंधन के लिए आधुनिक तकनीकों का उपयोग अनिवार्य हो गया है। भविष्य के युद्धों में एआई महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
थिएटर कमांड व्यवस्था पर बोलते हुए जनरल द्विवेदी ने बताया कि इस दिशा में प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है और संबंधित रिपोर्ट रक्षा मंत्रालय को सौंपी जा चुकी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि अगले दो से तीन वर्षों में यह व्यवस्था जमीन पर लागू होती दिखाई दे सकती है। नई प्रणाली में तीनों सेनाओं के प्रमुख अपनी-अपनी सेनाओं की तैयारी और संसाधनों का प्रबंधन करेंगे, जबकि थिएटर कमांडर संयुक्त सैन्य अभियानों का संचालन करेंगे।
सेना प्रमुख ने कहा कि भारतीय सेना ‘डिकेड ऑफ ट्रांसफॉर्मेशन’ के तहत खुद को भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप ढाल रही है। सेना तकनीक-सक्षम और आधुनिक युद्धक क्षमता विकसित करने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। उन्होंने बताया कि उपलब्ध संसाधनों के आधार पर नई सैन्य इकाइयों, आधुनिक हथियार प्रणालियों और तकनीक आधारित संरचनाओं का विकास किया जा रहा है, जिसमें युवा सैनिकों और अधिकारियों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होगी।