फिजिक्स, केमिस्ट्री समेत पांच विषयों में खुलेगा यूनिवर्सिटी टीचिंग डिपार्टमेंट, नई बिल्डिंग का इंतजार अभी जारी
दुर्ग स्थित हेमचंद यादव विश्वविद्यालय अब केवल परीक्षा और परिणाम तक सीमित नहीं रहेगा। स्थापना के करीब 11 वर्ष बाद विश्वविद्यालय में पहली बार यूनिवर्सिटी टीचिंग डिपार्टमेंट (यूटीडी) की शुरुआत होने जा रही है। नए शैक्षणिक सत्र से पांच विषयों में स्नातकोत्तर स्तर की पढ़ाई शुरू होगी, जिससे उच्च शिक्षा और शोध गतिविधियों को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।
दुर्ग। हेमचंद यादव विश्वविद्यालय में लंबे इंतजार के बाद शैक्षणिक विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। वर्ष 2015 में स्थापना के बाद अब तक विश्वविद्यालय मुख्य रूप से परीक्षा संचालन और परिणाम जारी करने तक सीमित था, लेकिन अब पहली बार विश्वविद्यालय परिसर में सीधे शिक्षण और शोध कार्य की शुरुआत की जा रही है।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने नए शैक्षणिक सत्र से यूनिवर्सिटी टीचिंग डिपार्टमेंट (यूटीडी) शुरू करने की तैयारी पूरी कर ली है। विश्वविद्यालय को पांच विषयों में स्नातकोत्तर कक्षाएं संचालित करने की मंजूरी मिल चुकी है। इनमें फिजिक्स, केमिस्ट्री, मैथेमेटिक्स, बॉटनी और जूलॉजी शामिल हैं। प्रवेश प्रक्रिया पूरी होते ही जुलाई से नियमित कक्षाएं शुरू कर दी जाएंगी।
कुलपति प्रो. संजय तिवारी ने बताया कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य केवल परीक्षा आयोजित करना नहीं बल्कि विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक माहौल, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और शोध के अवसर उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में शोध गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए प्री-पीएचडी परीक्षा पहले ही शुरू की जा चुकी है। साथ ही मेधावी विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करने के लिए गोल्ड मेडल की व्यवस्था भी की जाएगी।
विश्वविद्यालय को ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन (एआईसीटीई) से आठ नए व्यावसायिक पाठ्यक्रमों की भी मंजूरी मिली है। इनमें एमबीए, एमसीए और फिनटेक जैसे पाठ्यक्रम शामिल हैं। इसके अलावा राज्य सरकार के विजन को ध्यान में रखते हुए सप्लाई चेन मैनेजमेंट, ब्लॉकचेन मैनेजमेंट और ट्रैवल एंड टूरिज्म जैसे रोजगार आधारित पाठ्यक्रम शुरू करने की योजना बनाई जा रही है।
विश्वविद्यालय प्रशासन विशेष शिक्षा के क्षेत्र में भी विस्तार की तैयारी कर रहा है। रिहैबिलिटेशन काउंसिल ऑफ इंडिया (आरसीआई) के माध्यम से स्पेशल बीएड पाठ्यक्रम शुरू करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। साथ ही स्पेशल एजुकेशन के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित करने की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं।
यूटीडी की स्थापना के लिए लगभग आठ वर्ष पहले प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसर सहित कुल 64 पद स्वीकृत किए गए थे, लेकिन प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी। अब शिक्षण व्यवस्था शुरू होने के साथ इन पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया दोबारा शुरू होने की संभावना भी बढ़ गई है।
हालांकि विश्वविद्यालय की नई बिल्डिंग तैयार होने के बावजूद उसका लोकार्पण अब तक नहीं हो सका है। ऐसे में शुरुआती दौर में प्रैक्टिकल और अन्य शैक्षणिक गतिविधियों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की गई है। इसके लिए शासकीय वीवाईटी साइंस कॉलेज सहित अन्य संस्थानों के साथ समझौता किया गया है, ताकि विद्यार्थियों को प्रयोगशाला सुविधाओं का लाभ मिल सके।