जितने दिन की देरी, उतने दिन का ही देना होगा ब्याज; 66 लाख उपभोक्ताओं को नए नियम से फायदा
छत्तीसगढ़ के लाखों बिजली उपभोक्ताओं को अब बिजली बिल के भुगतान में राहत मिलने जा रही है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद उपभोक्ताओं को बिल जमा करने में मामूली देरी होने पर पूरे महीने का अतिरिक्त शुल्क नहीं देना पड़ेगा। अब जितने दिन की देरी होगी, केवल उसी अवधि का ब्याज लिया जाएगा।
रायपुर। छत्तीसगढ़ के करीब 66 लाख बिजली उपभोक्ताओं के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। राज्य में बिजली बिल के विलंबित भुगतान से जुड़े नियमों में बदलाव किया गया है, जिससे अब उपभोक्ताओं पर अनावश्यक आर्थिक बोझ नहीं पड़ेगा। नई व्यवस्था के तहत बिल भुगतान में हुई वास्तविक देरी के आधार पर ही अधिभार तय किया जाएगा।
छत्तीसगढ़ स्टेट पावर कंपनी ने स्पष्ट किया है कि सोशल मीडिया और विभिन्न माध्यमों में प्रसारित हो रही ‘दोहरा झटका’ या ‘रोजाना बढ़ते ब्याज’ जैसी खबरें पूरी तरह भ्रामक हैं। कंपनी के मुताबिक नई व्यवस्था का उद्देश्य उपभोक्ताओं को अतिरिक्त बोझ देना नहीं, बल्कि राहत पहुंचाना है।
अधिकारियों के अनुसार पहले यदि कोई उपभोक्ता बिजली बिल निर्धारित तारीख से केवल एक या दो दिन की देरी से भी जमा करता था, तब भी उसे पूरे महीने का 1.5 प्रतिशत लेट पेमेंट सरचार्ज देना पड़ता था। इससे कम देरी के बावजूद उपभोक्ताओं को अतिरिक्त राशि चुकानी पड़ती थी।
नई व्यवस्था में अब लेट पेमेंट अधिभार प्रतिदिन के आधार पर जोड़ा जाएगा। इसके लिए 0.04 प्रतिशत प्रतिदिन की दर निर्धारित की गई है। यानी उपभोक्ता जितने दिन की देरी करेगा, केवल उसी अवधि का अतिरिक्त शुल्क देना होगा।
उदाहरण के तौर पर यदि कोई उपभोक्ता एक दिन देर से बिल जमा करता है, तो उसे केवल 0.04 प्रतिशत अतिरिक्त राशि चुकानी होगी। वहीं यदि भुगतान में 30 दिन की देरी होती है, तब भी कुल अधिभार 1.2 प्रतिशत ही रहेगा, जो पहले लागू 1.5 प्रतिशत शुल्क से कम है।
पावर कंपनी का कहना है कि यह व्यवस्था उपभोक्ताओं के हितों को ध्यान में रखते हुए तैयार की गई है, ताकि बिजली बिल भुगतान प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और न्यायसंगत बनाया जा सके।