करीब 5,000 करोड़ रुपये के कथित ऑनलाइन बेटिंग और मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क का प्रमुख आरोपी, भारत ने शुरू की प्रत्यर्पण प्रक्रिया
महादेव ऑनलाइन बेटिंग नेटवर्क से जुड़े बहुचर्चित मामले में जांच एजेंसियों को बड़ी सफलता मिली है। लंबे समय से फरार चल रहे मुख्य आरोपियों में शामिल सौरभ चंद्राकर को इंटरपोल के रेड नोटिस के आधार पर ओमान में गिरफ्तार कर लिया गया है। गिरफ्तारी के बाद भारत सरकार ने उसके प्रत्यर्पण की औपचारिक प्रक्रिया शुरू कर दी है। उस पर फर्जी दस्तावेजों के जरिए ओमान में प्रवेश करने और हजारों करोड़ रुपये के कथित वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े नेटवर्क का हिस्सा होने के आरोप हैं।
रायपुर। महादेव ऑनलाइन बेटिंग नेटवर्क से जुड़े कथित वित्तीय घोटाले की जांच में एक अहम मोड़ आया है। लंबे समय से फरार चल रहे मुख्य आरोपी सौरभ चंद्राकर को इंटरपोल के रेड नोटिस के आधार पर रॉयल ओमान पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। अधिकारियों के अनुसार उस पर फर्जी इंडोनेशियाई पासपोर्ट का उपयोग कर ओमान में प्रवेश करने का आरोप भी है। गिरफ्तारी के बाद भारत सरकार ने उसे वापस लाने के लिए औपचारिक प्रत्यर्पण प्रक्रिया शुरू कर दी है। फिलहाल सौरभ चंद्राकर को ओमान की राजधानी मस्कट स्थित अल खौद हाई-सिक्योरिटी डिटेंशन सेंटर में रखा गया है, जहां से कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
हजारों करोड़ के कथित नेटवर्क की जांच
भिलाई निवासी सौरभ चंद्राकर का नाम करीब 5,000 करोड़ रुपये के कथित महादेव ऑनलाइन बेटिंग नेटवर्क से जुड़े वित्तीय लेन-देन, अवैध सट्टेबाजी और मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों में सामने आया है। जांच एजेंसियों के अनुसार वह वर्ष 2019 से उनकी पहुंच से बाहर था और विदेश में रहकर कथित तौर पर नेटवर्क का संचालन कर रहा था।
फर्जी दस्तावेजों की भी जांच
ओमान में उसके खिलाफ फर्जी यात्रा दस्तावेजों के उपयोग और अवैध तरीके से देश में प्रवेश करने का मामला भी दर्ज किया गया है। बताया जा रहा है कि कानूनी लड़ाई लड़ने के लिए उसने मस्कट में वकीलों की एक टीम नियुक्त की है। इस पूरे मामले की जांच प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) कर रहे हैं। एजेंसियां ऑनलाइन सट्टेबाजी, मनी लॉन्ड्रिंग और संदिग्ध वित्तीय लेन-देन के पूरे नेटवर्क की जांच में जुटी हैं।
रेड नोटिस रद्द कराने की कोशिश हुई थी नाकाम
हाल ही में इंटरपोल की कमिशन फॉर द कंट्रोल ऑफ इंटरपोल्स फाइल्स (CCF) ने सौरभ चंद्राकर की उस याचिका को भी खारिज कर दिया था, जिसमें उसने अपने खिलाफ जारी रेड नोटिस को निरस्त करने की मांग की थी। उसने दावा किया था कि भारत में उसके खिलाफ राजनीतिक कारणों से कार्रवाई की जा रही है, लेकिन आयोग ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया। आयोग ने माना कि मामला कथित वित्तीय अपराध और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा है, इसलिए रेड नोटिस प्रभावी रहेगा।
सौरभ चंद्राकर की गिरफ्तारी को महादेव ऑनलाइन बेटिंग नेटवर्क की जांच में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। अब प्रत्यर्पण प्रक्रिया पूरी होने के बाद भारतीय जांच एजेंसियां उससे पूछताछ कर मामले के वित्तीय नेटवर्क, सहयोगियों और धन के प्रवाह से जुड़े कई अहम पहलुओं की जांच आगे बढ़ा सकती हैं।