हिंदी भवन के सामने से टेंट जब्त, धरनास्थल पर सुरक्षा बढ़ाई; शिक्षक बोले- आंदोलन खत्म नहीं, मांगें पूरी होने तक संघर्ष रहेगा
बस्तर और आदिवासी अंचलों में पदस्थ अतिथि शिक्षकों के 22 दिनों से जारी आंदोलन पर प्रशासन ने देर रात कार्रवाई करते हुए धरना स्थल खाली करा दिया। पुलिस ने हिंदी भवन के सामने लगे टेंट को हटाकर जब्त कर लिया और गुरुवार सुबह धरना स्थल पहुंचे करीब 50 शिक्षकों को बसों में बैठाकर अन्य स्थानों पर ले गई। इसके बाद पूरे क्षेत्र में पुलिस बल तैनात कर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई।
प्रशासन की कार्रवाई के बाद भी आंदोलन जारी रखने का ऐलान
दुर्ग-भिलाई। अपनी विभिन्न मांगों को लेकर लंबे समय से आंदोलनरत अतिथि शिक्षकों के धरने पर बुधवार देर रात प्रशासन ने कार्रवाई की। हिंदी भवन के सामने संचालित धरना स्थल को खाली कराते हुए पुलिस ने वहां लगा टेंट हटाकर जब्त कर लिया। गुरुवार सुबह जब आंदोलनकारी दोबारा धरने के लिए पहुंचे तो पुलिस ने करीब 50 शिक्षकों को बसों में बैठाकर वहां से हटा दिया।
धरनास्थल के साथ स्टेशन और बस स्टैंड पर भी निगरानी
किसी भी नए प्रदर्शनकारी के आंदोलन में शामिल होने से रोकने के लिए प्रशासन ने धरनास्थल के अलावा बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन पर भी अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया। पूरे इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी गई और गतिविधियों पर लगातार नजर रखी गई।
पहले दी थी धरना समाप्त करने की चेतावनी
पुलिस ने कार्रवाई से पहले आंदोलनकारियों को धरना समाप्त करने की चेतावनी दी थी। हालांकि अतिथि शिक्षक अपनी मांगों पर अड़े रहे और धरना जारी रखा। चेतावनी के बाद देर रात प्रशासन ने धरना स्थल खाली कराने की कार्रवाई की।
शिक्षकों का ऐलान- संघर्ष जारी रहेगा
पुलिस कार्रवाई के बावजूद अतिथि शिक्षकों ने स्पष्ट किया कि उनका आंदोलन समाप्त नहीं हुआ है। उनका कहना है कि वे फिर से धरना शुरू करने का प्रयास करेंगे और जब तक सरकार उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लेती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
‘बातचीत हुई, फैसला अब भी बाकी’
आंदोलनकारी शिक्षकों का कहना है कि सरकार के साथ अब तक केवल चर्चा हुई है, लेकिन उनकी प्रमुख मांगों पर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया। इसी कारण वे आंदोलन वापस लेने के पक्ष में नहीं हैं और आगे की रणनीति जल्द तय करेंगे।