पाटन के शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला पतोरा का मामला, पालकों-ग्रामीणों की शिकायत के बाद हुई कार्रवाई; मारपीट, अभद्र व्यवहार और अनुशासनहीनता के आरोपों पर एक सप्ताह में आरोप पत्र तैयार करने के निर्देश
पाटन विकासखंड के शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला पतोरा की प्रधान पाठिका ममता शांडिल्य को छात्रों के साथ कथित मारपीट, अपमानजनक व्यवहार और शासकीय दायित्वों में लापरवाही के आरोपों के चलते निलंबित कर दिया गया है। विभागीय जांच में शिकायतों की पुष्टि होने के बाद शिक्षा संभाग दुर्ग के संयुक्त संचालक ने गुरुवार को यह कार्रवाई की। मामले में जिला शिक्षा अधिकारी को एक सप्ताह के भीतर आरोप पत्र प्रस्तुत करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
दुर्ग। पाटन विकासखंड के शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला पतोरा में पदस्थ प्रधान पाठिका ममता शांडिल्य के खिलाफ लंबे समय से छात्रों के साथ दुर्व्यवहार, शारीरिक दंड और अभद्र भाषा के प्रयोग की शिकायतें सामने आ रही थीं। ग्रामीणों, अभिभावकों और जनप्रतिनिधियों ने मामले की शिकायत कलेक्टर और शिक्षा विभाग से की, जिसके बाद जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) ने तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की।
जांच दल ने विद्यालय पहुंचकर विद्यार्थियों, ग्रामीणों, शिक्षकों तथा संबंधित प्रधान पाठिका के बयान दर्ज किए। दस्तावेजों और प्रत्यक्षदर्शियों के आधार पर तैयार रिपोर्ट में लगाए गए आरोप सही पाए गए। रिपोर्ट संयुक्त संचालक शिक्षा कार्यालय भेजी गई, जिसके आधार पर तत्काल प्रभाव से निलंबन का आदेश जारी किया गया।
छात्राओं में भय का वातावरण बनने की पुष्टि
निलंबन आदेश में उल्लेख किया गया है कि प्रधान पाठिका के व्यवहार से विद्यालय में छात्र-छात्राओं, विशेषकर छात्राओं के बीच भय और असुरक्षा का माहौल बन गया था। इससे विद्यालय का शैक्षणिक वातावरण और अनुशासन भी प्रभावित हुआ। विभाग ने इसे शासकीय सेवक के अपेक्षित आचरण के विपरीत माना है।
आचरण नियमों के उल्लंघन का आरोप
शिक्षा संभाग के संयुक्त संचालक ने आदेश में कहा कि संबंधित प्रधान पाठिका का व्यवहार शासकीय दायित्वों के प्रति गैर-जिम्मेदाराना, लापरवाहीपूर्ण और स्वेच्छाचारी पाया गया। इसे छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के नियम-3 का गंभीर उल्लंघन मानते हुए निलंबन की कार्रवाई की गई। निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय, दुर्ग निर्धारित किया गया है।
18 जुलाई की घटना के बाद बढ़ा विवाद
ग्रामीणों के अनुसार 18 जुलाई को एक छात्र के साथ कथित रूप से कांटेदार डंडे से मारपीट की गई थी, जिससे उसके हाथ में चोट आई। बताया गया कि स्कूल परिसर के पीछे जाने की बात पूछने पर छात्र को दंडित किया गया। इस घटना के बाद अभिभावकों और ग्रामीणों का आक्रोश बढ़ गया और बड़ी संख्या में लोग जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय पहुंचकर कार्रवाई की मांग करने लगे।
विद्यार्थियों ने लगाए अपमानजनक व्यवहार के आरोप
जांच के दौरान कुछ विद्यार्थियों ने आरोप लगाया कि प्रधान पाठिका अक्सर अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल करती थीं और पढ़ाई छोड़ने की धमकी देती थीं। एक छात्र ने अपने शारीरिक गठन का मजाक उड़ाए जाने का आरोप लगाया, जबकि कुछ छात्राओं ने निजी कार्य और चाय बनवाने जैसी शिकायतें भी दर्ज कराईं। विभाग ने इन आरोपों की अलग से जांच और आवश्यक कार्रवाई की बात कही है।
पहले भी हुई थी शिकायत
ग्रामीणों के मुताबिक मार्च 2026 में भी प्रधान पाठिका के खिलाफ शिक्षा मंत्री, जिला शिक्षा अधिकारी और विकासखंड शिक्षा अधिकारी को लिखित शिकायत सौंपी गई थी। उस समय जांच शुरू हुई, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। हालिया घटनाओं के बाद मामला फिर सामने आया और विभाग ने जांच पूरी कर निलंबन की कार्रवाई की।
12 बिंदुओं पर दर्ज हुई शिकायत
शिकायत पत्र में छात्रों से मारपीट, अभद्र भाषा, कथित जातिसूचक टिप्पणी, शिक्षकों से दुर्व्यवहार, निजी कार्य करवाने, बिना अनुमति अनुपस्थित रहने, शैक्षणिक कार्य प्रभावित करने, सरकारी संसाधनों के कथित दुरुपयोग और प्रशासनिक अनियमितताओं सहित 12 बिंदुओं पर आरोप लगाए गए थे। इन सभी बिंदुओं की विभागीय जांच की गई।
- एक सप्ताह में आरोप पत्र पेश करने के निर्देश
निलंबन आदेश के साथ जिला शिक्षा अधिकारी, दुर्ग को एक सप्ताह के भीतर आरोप पत्र तैयार कर प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। डीईओ अरविंद मिश्रा ने कहा कि शिक्षा विभाग पहले ही सभी शिक्षकों को विद्यार्थियों के साथ शारीरिक दंड और मानसिक प्रताड़ना पर पूर्ण प्रतिबंध के निर्देश दे चुका है। भविष्य में इस प्रकार की शिकायतें मिलने पर नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।