विपक्ष का संसद परिसर में प्रदर्शन, खड़गे ने केंद्रीय एजेंसियों की भूमिका पर उठाए सवाल; रिजिजू ने कांग्रेस पर किया पलटवार
नई दिल्ली (ए)। राम मंदिर चढ़ावा चोरी के कथित मामले को लेकर मंगलवार को संसद के दोनों सदनों में जोरदार हंगामा हुआ। विपक्षी सांसदों ने संसद परिसर में प्रदर्शन कर सरकार से जवाब मांगा, जबकि राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू के बीच तीखी बहस देखने को मिली। लगातार शोर-शराबे के कारण लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही निर्धारित समय से पहले स्थगित करनी पड़ी।
लोकसभा की कार्यवाही शुरू होने के कुछ ही मिनट बाद दोपहर 2 बजे तक स्थगित कर दी गई, जबकि राज्यसभा में लगभग आधे घंटे तक चले हंगामे के बाद सदन की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक टाल दी गई। संसद परिसर में कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी सहित कई विपक्षी सांसदों ने विरोध प्रदर्शन करते हुए मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की।
खड़गे ने सरकार और एजेंसियों को घेरा
राज्यसभा में मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन केंद्र सरकार की पहल पर हुआ था और उसे 70 एकड़ से अधिक भूमि सौंपी गई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि जब प्रधानमंत्री स्वयं राम मंदिर से जुड़े प्रमुख आयोजनों में शामिल रहे हैं, तब इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED), केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) और अन्य केंद्रीय एजेंसियां निष्क्रिय क्यों हैं। उन्होंने सरकार से सदन में स्पष्ट जवाब देने की मांग की।
रिजिजू का पलटवार
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष के आरोपों को राजनीतिक बताया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और समाजवादी पार्टी वर्षों तक भगवान राम और राम मंदिर के निर्माण का विरोध करती रही हैं। रिजिजू ने आरोप लगाया कि अब वही दल राजनीतिक लाभ के लिए इस मुद्दे पर घड़ियाली आंसू बहा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार से जवाब मांगने से पहले विपक्ष को भगवान राम के प्रति अपने पुराने रुख के लिए देश से माफी मांगनी चाहिए।
संसद में लगातार गतिरोध
राम मंदिर चढ़ावा मामले को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बढ़ते टकराव ने मानसून सत्र के दौरान एक बार फिर संसद की कार्यवाही को प्रभावित किया। विपक्ष इस मामले में विस्तृत चर्चा और जांच की मांग पर अड़ा रहा, जबकि सरकार ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए उन्हें राजनीतिक एजेंडा करार दिया।