ऑनलाइन रिकॉर्ड, स्वतः नामांतरण, ई-कोर्ट और व्हाट्सएप सूचना जैसी सुविधाओं से बदला राजस्व प्रशासन; किसानों और भू-स्वामियों को मिल रही बड़ी राहत
रायपुर। राज्य सरकार ने राजस्व प्रशासन को अधिक पारदर्शी, तकनीक आधारित और जनहितैषी बनाने की दिशा में कई महत्वपूर्ण सुधार लागू किए हैं। भूमि संबंधी प्रक्रियाओं को सरल बनाने, रिकॉर्ड प्रबंधन को डिजिटल स्वरूप देने और वर्षों से लंबित मामलों के समयबद्ध निराकरण के उद्देश्य से राजस्व विभाग ने ऑनलाइन सेवाओं और आधुनिक तकनीक का व्यापक विस्तार किया है। स्वतः नामांतरण (ऑटोमैटिक म्यूटेशन), ऑटो डायवर्सन, डिजिटल ऋण पुस्तिका, व्हाट्सएप अलर्ट और ऑनलाइन ई-कोर्ट जैसी व्यवस्थाओं ने नागरिकों को तेज, आसान और पारदर्शी सेवाएं उपलब्ध करानी शुरू कर दी हैं।
ई-प्रणाली से तेज हुआ राजस्व रिकॉर्ड का संप्रेषण
2 अप्रैल 2025 को जारी विशेष आदेश के तहत राजस्व रिकॉर्ड के भौतिक दस्तावेजों के स्थान पर डिजिटल स्वरूप को प्राथमिकता दी गई है। भारसाधक अधिकारी को सत्यापनकर्ता की जिम्मेदारी सौंपते हुए अब अधिकांश रिकॉर्ड ई-प्रणाली के माध्यम से उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इससे कागजी प्रक्रिया में लगने वाला समय घटा है और मामलों के निपटारे में तेजी आई है।
कृषि भूमि की अदला-बदली की प्रक्रिया हुई सरल
राजस्व संहिता के तहत किसानों और भू-स्वामियों को कृषि भूमि की परस्पर अदला-बदली का अधिकार प्राप्त है। 21 अक्टूबर 2025 को जारी नए दिशा-निर्देशों के बाद यह प्रक्रिया अधिक स्पष्ट, पारदर्शी और सुविधाजनक हो गई है, जिससे किसानों को भूमि प्रबंधन में व्यावहारिक लाभ मिल रहा है।
अभिलेखों की त्रुटियां अब तहसील स्तर पर सुधरेंगी
राजस्व रिकॉर्ड में नाम, जाति, पता या फसल प्रविष्टि जैसी लिपिकीय त्रुटियों के कारण नागरिकों को लंबे समय तक परेशानियों का सामना करना पड़ता था। 19 जुलाई 2024 की अधिसूचना के बाद ऐसे मामलों में त्वरित सुधार का अधिकार सीधे तहसीलदार को दिया गया है, जिससे अनावश्यक मुकदमेबाजी और विलंब में कमी आई है।
अवैध प्लाटिंग के खिलाफ सख्त कार्रवाई
जनवरी 2026 में राजस्व विभाग ने सभी जिला कलेक्टरों को अवैध प्लाटिंग रोकने के लिए कड़े निर्देश जारी किए। जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में गठित विशेष समितियां अब ऐसे मामलों में त्वरित कानूनी कार्रवाई कर रही हैं, जिससे आम भू-खरीदारों के हितों की बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित हो रही है।
पुराने परिपत्र निरस्त, नई व्यवस्था लागू
23 जुलाई 2024 को जारी आदेश के तहत नगरीय क्षेत्रों में शासकीय एवं अतिक्रमित भूमि के व्यवस्थापन और आवंटन से संबंधित वर्ष 2019, 2020 और 2022 के पुराने परिपत्रों को निरस्त कर दिया गया। नई डिजिटल व्यवस्था और सरलीकृत प्रक्रियाओं के माध्यम से राजस्व प्रशासन को अधिक प्रभावी, जवाबदेह और समयबद्ध बनाने की दिशा में यह महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।