होर्मुज स्ट्रेट पर निर्भरता घटाने के लिए सऊदी, यूएई और कुवैत अरबों डॉलर की पाइपलाइन और ऊर्जा परियोजनाओं में कर रहे निवेश
ईरान के साथ बढ़े सैन्य तनाव ने पश्चिम एशिया के तेल कारोबार की दशकों पुरानी व्यवस्था को बदलना शुरू कर दिया है। होर्मुज स्ट्रेट से तेल आपूर्ति पर बढ़ते खतरे और ढुलाई लागत में तेज उछाल के बाद खाड़ी देश अब वैकल्पिक निर्यात मार्ग विकसित करने में जुट गए हैं। नई पाइपलाइन, बंदरगाह विस्तार और ऊर्जा अवसंरचना परियोजनाओं पर अरबों डॉलर का निवेश किया जा रहा है, ताकि भविष्य में तेल और गैस निर्यात किसी एक समुद्री मार्ग पर निर्भर न रहे।
समाचार (ए)। पश्चिम एशिया में हालिया सैन्य घटनाक्रम के बाद होर्मुज स्ट्रेट से कच्चे तेल की आवाजाही गंभीर रूप से प्रभावित हुई है। समुद्री सुरंगों, मिसाइल और ड्रोन हमलों की आशंका, संभावित नाकेबंदी तथा बीमा लागत बढ़ने के कारण इस मार्ग से गुजरने वाले तेल की मात्रा में भारी गिरावट दर्ज की गई। यही कारण है कि सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और कुवैत जैसे प्रमुख तेल उत्पादक देश अब अपने निर्यात तंत्र को नए सिरे से तैयार कर रहे हैं।
फुजैरा बना यूएई की नई ऊर्जा रणनीति का केंद्र
यूएई ने ओमान की खाड़ी के किनारे स्थित फुजैरा बंदरगाह को वैकल्पिक तेल निर्यात केंद्र के रूप में विकसित करना तेज कर दिया है। अबू धाबी के तेल क्षेत्रों को सीधे फुजैरा से जोड़ने वाली दूसरी पाइपलाइन पर तेजी से काम चल रहा है। इसके पूरा होने पर यूएई की होर्मुज स्ट्रेट को बायपास कर तेल निर्यात करने की क्षमता लगभग 36 लाख बैरल प्रतिदिन तक पहुंच जाएगी। इससे देश का अधिकांश ऑनशोर कच्चा तेल सीधे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भेजा जा सकेगा।
गैस निर्यात को भी सुरक्षित बनाने की तैयारी
यूएई केवल तेल तक सीमित नहीं है। उसकी सरकारी ऊर्जा कंपनी एडीएनओसी ने प्राकृतिक गैस परियोजनाओं में 8.2 अरब डॉलर निवेश की घोषणा की है। पूर्वी तट पर नया एलएनजी निर्यात टर्मिनल विकसित करने की योजना भी बनाई जा रही है, ताकि गैस आपूर्ति भी होर्मुज स्ट्रेट पर कम निर्भर रहे।
सऊदी अरब ने रेड सी मार्ग को दी प्राथमिकता
सऊदी अरब ने अपनी 1,201 किलोमीटर लंबी ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन का उपयोग तेजी से बढ़ा दिया है। यह पाइपलाइन पूर्वी तेल क्षेत्रों को रेड सी स्थित यानबू बंदरगाह से जोड़ती है। वर्तमान में इसके माध्यम से प्रतिदिन लगभग 70 लाख बैरल कच्चा तेल रेड सी के रास्ते वैश्विक बाजारों तक पहुंचाया जा रहा है। सरकार इसकी क्षमता में और वृद्धि के साथ-साथ रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पादों के लिए समानांतर नई पाइपलाइन विकसित करने की दिशा में भी काम कर रही है।
ऊर्जा सुरक्षा बनी सर्वोच्च प्राथमिकता
विश्लेषकों का मानना है कि हालिया संकट ने खाड़ी देशों को यह स्पष्ट संकेत दिया है कि केवल होर्मुज स्ट्रेट पर निर्भर रहना दीर्घकालिक दृष्टि से जोखिमपूर्ण है। इसी कारण क्षेत्र के प्रमुख तेल निर्यातक अब बहु-विकल्पीय परिवहन नेटवर्क, अतिरिक्त पाइपलाइन और विदेशी तेल भंडारण सुविधाओं के निर्माण पर तेजी से निवेश बढ़ा रहे हैं। आने वाले वर्षों में यह बदलाव वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और तेल व्यापार की दिशा को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित कर सकता है।