जगदलपुर की NIA विशेष अदालत ने सभी आरोपियों को ठहराया दोषी; अभियोजन ने पेश किए 101 गवाह, 16 सितंबर को सजा पर फैसला
जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित झीरम घाटी नक्सली हमले के मामले में 13 साल बाद अदालत का फैसला आया है। जगदलपुर की NIA विशेष अदालत ने मामले में सुनवाई का सामना कर रहे सभी 10 आरोपियों को दोषी करार दिया है। इस प्रकरण में कुल 11 आरोपियों के खिलाफ सुनवाई चली थी, लेकिन एक आरोपी की ट्रायल के दौरान मौत हो गई। अदालत अब 16 सितंबर को दोषियों की सजा पर फैसला सुनाएगी।
25 मई 2013 को कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा के काफिले पर झीरम घाटी में घात लगाकर नक्सली हमला किया गया था। NIA के रिकॉर्ड के अनुसार इस हमले में 27 लोगों की जान गई थी, जिनमें 10 पुलिसकर्मी भी शामिल थे, जबकि 38 लोग घायल हुए थे।
101 गवाहों और दस्तावेजों के आधार पर हुई सुनवाई
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अदालत के सामने 101 गवाहों के बयान और विभिन्न दस्तावेजी साक्ष्य पेश किए। 10 अगस्त को अंतिम बहस पूरी होने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। बचाव पक्ष ने आरोपों को चुनौती दी थी, जबकि अभियोजन ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोप साबित होने का दावा किया था।
बचाव पक्ष बोला- फैसले से संतुष्ट नहीं, हाईकोर्ट जाएंगे
दोषसिद्धि के बाद बचाव पक्ष के वकील अरविंद चौधरी ने कहा कि वे अदालत के फैसले से संतुष्ट नहीं हैं। उन्होंने फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती देने की बात कही है।
कांग्रेस ने उठाए जांच पर सवाल
फैसले के बाद कांग्रेस नेताओं ने कहा कि अदालत ने जिन आरोपियों को दोषी माना है, उनके अलावा हमले की साजिश रचने वाले बड़े नक्सली नेताओं की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए। पीसीसी अध्यक्ष दीपक बैज ने इसे राजनीतिक षड्यंत्र और सुपारी किलिंग बताते हुए कहा कि असली साजिशकर्ताओं तक जांच नहीं पहुंची।
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल भी पहले NIA की जांच पर सवाल उठा चुके हैं। उनका आरोप रहा है कि दरभा थाने की FIR में नामजद कुछ लोगों से पूछताछ नहीं की गई और झीरम हमले की साजिश के पीछे की पूरी कड़ी सामने नहीं लाई गई।
क्या हुआ था झीरम घाटी में?
2013 के विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने प्रदेश में परिवर्तन यात्रा निकाली थी। 25 मई को सुकमा की सभा के बाद कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं का काफिला जगदलपुर की ओर लौट रहा था। इसी दौरान झीरम घाटी के जंगल में नक्सलियों ने काफिले पर हमला कर दिया। हमले में कांग्रेस के कई बड़े नेता और सुरक्षाकर्मी मारे गए। NIA ने बाद में मामले की जांच अपने हाथ में ली।