चीन ने विदेशी पत्रकारों को ग्यिरोंग पोर्ट ले जाकर दिखाई बाढ़ की तबाही; चीन-नेपाल में मृतकों का आंकड़ा 1300 पार
तिब्बत-नेपाल सीमा पर 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ के बाद पहली बार अंतरराष्ट्रीय मीडिया को प्रभावित क्षेत्र तक पहुंच मिली है। चीन के विदेश मंत्रालय की निगरानी में विदेशी पत्रकारों ने ग्यिरोंग बॉर्डर क्रॉसिंग का दौरा किया और वहां मची तबाही को अपनी आंखों से देखा। कभी पांच मंजिला कस्टम्स बिल्डिंग और करीब 20 मीटर ऊंचा बॉर्डर गेट नजर आने वाले इस इलाके में अब सिर्फ कीचड़, पत्थर और मलबे का ढेर है। चीन और नेपाल में आपदा से 1300 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 5 हजार से अधिक लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं।
तिब्बत-नेपाल (ए)। बाढ़ की तेज धारा अपने साथ पानी के अलावा भारी मात्रा में मिट्टी, पत्थर और मलबा लेकर आई थी। इसकी चपेट में आने के बाद ग्यिरोंग पोर्ट का बड़ा हिस्सा पूरी तरह तबाह हो गया। विदेशी पत्रकारों के दौरे के दौरान बचाव दल मलबे के बीच लगातार तलाशी अभियान में जुटा दिखाई दिया।
बचावकर्मी भारी मशीनों और फावड़ों के साथ मलबा हटाने के अलावा जमीन के भीतर दबे लोगों की तलाश के लिए विशेष रडार उपकरणों का इस्तेमाल कर रहे हैं। अभियान का सबसे मुश्किल हिस्सा यह है कि कई जगहों पर मलबे की मोटी परत जमा है।

बॉर्डर गेट का भी नहीं बचा निशान
आपदा से पहले ग्यिरोंग पोर्ट पर चीन की पांच मंजिला कस्टम्स बिल्डिंग मौजूद थी। बाढ़ की ताकत के सामने यह इमारत भी नहीं टिक सकी। अब वहां उसका कोई स्पष्ट अवशेष नजर नहीं आता। करीब 20 मीटर ऊंचा बॉर्डर गेट भी मलबे के नीचे दब गया है। आसपास मौजूद पानी के टावर का कुछ हिस्सा ही दिखाई दे रहा है।
जहां पहले बॉर्डर गेट खड़ा था, वहां चीन का झंडा लगाया गया है। इसके चारों ओर दूर तक भूरे और काले रंग का मलबा फैला हुआ है। चेतावनी बोर्ड लगाए गए हैं और उनके पीछे बचावकर्मी लगातार खुदाई कर रहे हैं।
नेपाल से शुरू हुई तबाही, चीन तक पहुंची
चीन का दावा है कि आपदा की शुरुआत नेपाल की ओर ग्लेशियर टूटने से हुई। इसके बाद अचानक आई पानी और मलबे की लहर ने सीमा क्षेत्र को अपनी चपेट में ले लिया। चीन ने प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव अभियान तेज किया है।