यह कोई असली विटामिन नहीं, बल्कि भोजन से मिलने वाला आनंद है; तनावमुक्त होकर खाने से पाचन बेहतर, 10 तरीकों से हेल्दी फूड को बनाएं स्वादिष्ट
खाना सिर्फ पेट भरने के लिए नहीं है। उसके स्वाद, खुशबू और पसंद का आनंद लेना भी हमारी सेहत से जुड़ा है। न्यूट्रिशन एक्सपर्ट्स इसे ‘विटामिन P’ यानी प्लेजर कहते हैं। यह कोई वास्तविक विटामिन नहीं, बल्कि भोजन से मिलने वाली खुशी और संतुष्टि का कॉन्सेप्ट है। विशेषज्ञों के मुताबिक, जब हम तनावमुक्त होकर पसंद का पौष्टिक भोजन खाते हैं तो शरीर का ‘रेस्ट एंड डाइजेस्ट’ सिस्टम सक्रिय होता है, जिससे पाचन प्रक्रिया को बेहतर तरीके से काम करने में मदद मिल सकती है।
स्वादिष्ट खाना ब्रेन को देता है खुशी का संकेत
भोजन का स्वाद जीभ के रिसेप्टर्स को सक्रिय करता है। वहां से संकेत मस्तिष्क के रिवार्ड सेंटर तक पहुंचते हैं। इसके बाद डोपामिन रिलीज होता है, जिससे खुशी और संतुष्टि महसूस होती है। यही वजह है कि कुछ खास व्यंजन हमें बचपन, परिवार या किसी यादगार मौके की याद दिला देते हैं।
डोपामिन मूड, मोटिवेशन और फोकस से भी जुड़ा होता है। भोजन का सकारात्मक अनुभव कुछ समय के लिए तनाव और बेचैनी कम करने में मदद कर सकता है।
खुशी से खाना, पाचन के लिए भी फायदेमंद
भोजन के दौरान शरीर रिलैक्स रहता है तो पैरासिम्पेथेटिक नर्वस सिस्टम सक्रिय होता है। लार, पेट के एसिड और डाइजेस्टिव एंजाइम का स्राव पाचन प्रक्रिया में मदद करता है। आंतों द्वारा पोषक तत्वों के अवशोषण और पेट भरने के संकेतों पर भी इसका असर पड़ सकता है।
गुस्से में खाना क्यों पड़ सकता है भारी
तनाव, गुस्सा या चिंता की स्थिति में शरीर कोर्टिसोल और एड्रेनालिन जैसे हार्मोन रिलीज करता है। ऐसे में पाचन प्रभावित हो सकता है। कुछ लोगों को गैस, अपच, पेट फूलना या बेचैनी जैसी परेशानी महसूस हो सकती है। तनाव में खाते समय पेट भरने का अहसास भी देर से हो सकता है, जिससे जरूरत से ज्यादा खाने की संभावना बढ़ जाती है।
प्लेजर ईटिंग और इमोशनल ईटिंग अलग
पसंदीदा भोजन का स्वाद और आनंद लेने के लिए खाना प्लेजर ईटिंग है। इसके विपरीत तनाव, उदासी, गुस्से या अकेलेपन से राहत पाने के लिए बार-बार खाना इमोशनल ईटिंग कहलाता है। यदि भूख न होने के बावजूद केवल मूड ठीक करने के लिए खाने की इच्छा हो रही है, तो यह इमोशनल ईटिंग का संकेत हो सकता है।
बीमारी में भी स्वाद का महत्व
बीमारी के दौरान पसंद का पौष्टिक भोजन खाने से व्यक्ति को पर्याप्त ऊर्जा, प्रोटीन और दूसरे पोषक तत्व मिल सकते हैं। इससे शरीर को संक्रमण से लड़ने और क्षतिग्रस्त ऊतकों की मरम्मत में मदद मिलती है। हालांकि ‘हैप्पी फूड’ का मतलब जंक फूड नहीं है।
मोबाइल दूर रखकर खाएं
खाते समय मोबाइल या टीवी पर ध्यान रहने से भोजन के स्वाद, खुशबू और बनावट का अनुभव कम हो सकता है। इससे माइंडफुल ईटिंग की आदत प्रभावित होती है और भोजन केवल पेट भरने की प्रक्रिया बनकर रह जाता है।
हेल्दी फूड को स्वादिष्ट बनाने के 10 तरीके
मसालों का संतुलित इस्तेमाल करें – स्वाद के साथ पोषण भी बढ़ेगा।
ताजी जड़ी-बूटियां डालें – धनिया, पुदीना जैसी चीजें खुशबू और स्वाद बढ़ाती हैं।
सब्जियों में विविधता रखें – रोज एक जैसी सब्जी खाने से बचें।
टेक्सचर बदलें – कुरकुरी, नरम और रसदार चीजों का संतुलन बनाएं।
दही और चटनी का इस्तेमाल करें – साधारण भोजन को भी स्वादिष्ट बना सकते हैं।
प्लेटिंग पर ध्यान दें – रंग-बिरंगे खाद्य पदार्थ भोजन को आकर्षक बनाते हैं।
पसंदीदा हेल्दी चीजें चुनें – जिस पौष्टिक भोजन का स्वाद अच्छा लगे, उसे प्राथमिकता दें।
धीरे-धीरे खाएं – स्वाद और खुशबू को महसूस करने का समय मिलेगा।
खाने के दौरान स्क्रीन से दूरी रखें – भोजन पर पूरा ध्यान केंद्रित करें।
परिवार के साथ भोजन करें – साथ बैठकर खाना बातचीत और भावनात्मक जुड़ाव बढ़ा सकता है।
जंक फूड की खुशी को विटामिन P न समझें
शुगर, नमक और अस्वास्थ्यकर वसा से भरपूर खाद्य पदार्थ रिवार्ड सिस्टम को तेजी से उत्तेजित कर सकते हैं। इससे बार-बार वही भोजन खाने की इच्छा बढ़ सकती है। ऐसे खाद्य पदार्थों का लगातार अधिक सेवन मोटापा, डायबिटीज और हृदय संबंधी बीमारियों के जोखिम से जुड़ा है।