PLI की नई व्यवस्था में भेदभाव का आरोप, पेंशन अपडेशन और OPS समेत पुरानी मांगें भी उठीं; दो साल से लंबित 5-डे बैंकिंग पर भी बढ़ा दबाव
नई दिल्ली। बैंकिंग क्षेत्र में कर्मचारियों की मांगों को लेकर एक बार फिर माहौल गरमा गया है। 5-डे बैंकिंग लागू करने में हो रही देरी और नई PLI (परफॉर्मेंस लिंक्ड इंसेंटिव) व्यवस्था को लेकर बैंक यूनियनों ने सरकार और बैंक प्रबंधन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। यूनियनों का आरोप है कि नई PLI व्यवस्था में अधिकारियों और निचले स्तर के कर्मचारियों के बीच बड़ा अंतर रखा गया है। वहीं, पेंशन अपडेशन, समान महंगाई भत्ता और NPS कर्मचारियों को पुरानी पेंशन योजना में शामिल करने जैसी मांगों को भी प्रमुखता से उठाया गया है।
PLI को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट और श्रम आयुक्त तक पहुंचा विवाद
PLI स्कीम को लेकर विवाद अब मुख्य श्रम आयुक्त के समक्ष सुलह प्रक्रिया में पहुंच गया है। वहीं, इस व्यवस्था को दिल्ली हाईकोर्ट में भी चुनौती दी गई है। बैंक यूनियनों की मांग है कि इंसेंटिव स्कीम में बदलाव एकतरफा तरीके से करने के बजाय द्विपक्षीय बातचीत के माध्यम से किया जाए।
यूनियनों ने वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवाएं विभाग की ओर से जारी नई PLI गाइडलाइंस पर भी सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि मौजूदा व्यवस्था कर्मचारियों के बीच समानता के सिद्धांत के अनुरूप नहीं है।
अधिकारियों और कर्मचारियों के PLI में बड़ा अंतर
यूनियनों के मुताबिक, नई व्यवस्था में स्केल IV और उससे ऊपर के अधिकारियों को व्यक्तिगत प्रदर्शन के आधार पर अधिकतम 365 दिनों के बेसिक पे के बराबर PLI मिलने का प्रावधान है। इसके विपरीत वर्कमेन तथा स्केल I से III तक के कर्मचारियों को अधिकतम 15 दिनों के बेसिक पे और डीए तक ही इंसेंटिव मिलने की बात कही गई है।
UFBU का कहना है कि PLI को केवल व्यक्तिगत प्रदर्शन से जोड़ने के बजाय बैंक के समग्र प्रदर्शन से जोड़ा जाना चाहिए। संगठन की मांग है कि स्केल VII तक के सभी कर्मचारियों के लिए इंसेंटिव के दिनों में समानता होनी चाहिए। यूनियनों ने इसे IBA और कर्मचारी संगठनों के बीच हुए समझौते की भावना के विपरीत बताया है।
दो साल से अटका 5-डे बैंकिंग का प्रस्ताव
बैंक कर्मचारियों की एक प्रमुख मांग 5-डे बैंकिंग भी है। UFBU के अनुसार, 8 मार्च 2024 को IBA के साथ हुए 12वें द्विपक्षीय समझौते और 9वें जॉइंट नोट में पांच दिन बैंकिंग व्यवस्था लागू करने पर सहमति बनी थी। प्रस्ताव के अनुसार, कर्मचारियों को सोमवार से शुक्रवार तक प्रतिदिन करीब 40 मिनट अतिरिक्त काम करना होगा और इसके बदले शनिवार को बैंक बंद रहेंगे।
IBA की ओर से प्रस्ताव को मंजूरी देकर केंद्र सरकार के पास भेजे जाने के बावजूद अब तक अंतिम स्वीकृति नहीं मिलने पर यूनियनों में नाराजगी है।
हर शनिवार बैंक बंद रखने की मांग
मौजूदा व्यवस्था में महीने के दूसरे और चौथे शनिवार को बैंक बंद रहते हैं। 5-डे बैंकिंग लागू होने के बाद महीने के सभी शनिवार को अवकाश देने का प्रस्ताव है। इसके बदले सोमवार से शुक्रवार तक दैनिक कार्य अवधि में 40 मिनट की बढ़ोतरी की जाएगी।
पेंशन और पुरानी पेंशन योजना भी एजेंडे में
बैंक यूनियनों ने केवल 5-डे बैंकिंग और PLI तक अपनी मांगें सीमित नहीं रखी हैं। पेंशनभोगियों के लिए पेंशन अपडेशन और सुधार, सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लिए समान महंगाई भत्ता फॉर्मूला तथा NPS के दायरे में आने वाले कर्मचारियों को पुरानी पेंशन योजना में जाने का विकल्प देने की मांग भी उठाई गई है।
हड़ताल से बैंकिंग सेवाओं पर असर की आशंका
यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस की ओर से 5-डे वर्किंग सहित विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलन का ऐलान किया गया है। बैंक यूनियनों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार और बैंक प्रबंधन ने मांगों पर सकारात्मक फैसला नहीं लिया, तो आगे आंदोलन को और व्यापक किया जा सकता है।
हड़ताल के दौरान बैंक शाखाओं में कामकाज प्रभावित होने की संभावना जताई गई है। हालांकि, UPI, मोबाइल बैंकिंग और ATM जैसी डिजिटल बैंकिंग सेवाएं सामान्य रूप से उपलब्ध रहने की उम्मीद है। बैंक प्रबंधन की ओर से ग्राहकों को भी सलाह दी गई है कि वे आवश्यक बैंकिंग कार्य पहले से निपटा लें।