भारत मंडपम में 45 मिनट चली द्विपक्षीय वार्ता; पुतिन ने मोदी को रूस आने का न्योता दिया, PM ने स्वीकार किया
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की दिल्ली में मुलाकात के दौरान भारत-रूस संबंधों को लेकर महत्वपूर्ण चर्चा हुई। भारत मंडपम में दोनों नेताओं के बीच करीब 45 मिनट तक द्विपक्षीय बैठक चली। बातचीत के बाद दोनों नेता एक ही कार में सवार होकर इंडस्ट्रियल एग्जीबिशन देखने पहुंचे।
बैठक के दौरान दोनों देशों के आपसी संबंधों के साथ अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों पर भी चर्चा हुई। रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 24वें भारत-रूस समिट में शामिल होने के लिए रूस आने का निमंत्रण दिया। प्रधानमंत्री ने निमंत्रण स्वीकार कर लिया।
मिडिल ईस्ट और ब्लैक सी तनाव पर भी चर्चा
बैठक में मिडिल ईस्ट और ब्लैक सी क्षेत्र में जारी तनाव का मुद्दा भी उठा। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि किसी भी विवाद और संघर्ष का समाधान बातचीत तथा कूटनीति के माध्यम से ही निकाला जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि भारत शांति स्थापित करने और तनाव कम करने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों में सहयोग के लिए तैयार है।
गर्मजोशी से हुआ पुतिन का स्वागत
प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति पुतिन का गर्मजोशी से स्वागत किया और दोनों नेता गले मिले। इसके बाद दोनों ने द्विपक्षीय वार्ता की। बैठक के बाद वे भारत मंडपम में आयोजित इनरोप्रोम इंडस्ट्रियल एग्जीबिशन देखने पहुंचे।
यह प्रदर्शनी भारत मंडपम में पहली बार आयोजित की जा रही है। इनरोप्रोम रूस की प्रमुख औद्योगिक और मैन्युफैक्चरिंग प्रदर्शनियों में शामिल है।
बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट भी देखा
प्रदर्शनी के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन ने विभिन्न औद्योगिक परियोजनाओं की जानकारी ली। दोनों नेताओं ने बुलेट ट्रेन से संबंधित एक प्रोजेक्ट भी देखा।
इस दौरान दोनों देशों के बीच औद्योगिक, तकनीकी और विनिर्माण क्षेत्र में सहयोग की संभावनाओं को भी प्रमुखता मिली।
मोदी ने पुतिन को भेंट की रूसी भाषा में तिरुक्कुरल
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति पुतिन को तमिल संत-कवि और दार्शनिक तिरुवल्लुवर की प्रसिद्ध कृति तिरुक्कुरल का रूसी भाषा में अनुवादित संस्करण भेंट किया।
तिरुक्कुरल में करीब 1,330 दोहे हैं। इनमें नैतिकता, बेहतर जीवन, शासन, अर्थव्यवस्था, प्रेम और मानवीय मूल्यों से जुड़े विचार शामिल हैं। इसे तमिल साहित्य की महत्वपूर्ण कृतियों में गिना जाता है और इसका कई भाषाओं में अनुवाद हो चुका है।
BRICS मंच पर स्थानीय मुद्राओं में कारोबार की पैरवी
BRICS बिजनेस फोरम में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने सदस्य देशों के बीच आपसी व्यापार में स्थानीय मुद्राओं के इस्तेमाल को बढ़ाने की वकालत की। उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक व्यवस्था कुछ सीमित मुद्राओं पर अधिक निर्भर है और ऐसी निर्भरता राजनीतिक संकटों से प्रभावित हो सकती है।