SIR प्रक्रिया पर उठाए सवाल, दोनों दलों के समर्थकों ने करीब 2 किमी तक निकाला मार्च; उद्धव बोले- चुनाव आयोग को सरकार तय करने का अधिकार नहीं
मुंबई में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे ने संयुक्त रूप से प्रदर्शन किया। दोनों नेताओं के नेतृत्व में हजारों समर्थकों ने मेट्रो स्टेशन से महानगरपालिका भवन तक करीब 2 किलोमीटर पैदल मार्च निकाला। शिवसेना यूबीटी और मनसे ने चुनावी प्रक्रिया और महाराष्ट्र में विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर सवाल उठाते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग की।
मुंबई। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ रविवार को मुंबई में उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे एक मंच पर नजर आए। दोनों नेताओं ने अपने समर्थकों के साथ मार्च निकालकर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और महाराष्ट्र में हुई SIR प्रक्रिया पर सवाल उठाए। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और समर्थक शामिल हुए।

मार्च मेट्रो स्टेशन से शुरू होकर महानगरपालिका भवन तक पहुंचा। दोनों नेताओं के साथ समर्थकों ने करीब 2 किलोमीटर पैदल मार्च किया। शिवसेना यूबीटी और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना ने आरोप लगाया कि चुनावी प्रक्रिया में गड़बड़ी की जा रही है और इसी आधार पर ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग उठाई।

राज ठाकरे ने SIR रद्द करने की मांग की
राज ठाकरे ने महाराष्ट्र में कराई गई SIR प्रक्रिया को रद्द करने की मांग की। उन्होंने कहा कि सरकार किसकी बनेगी, इसका निर्णय मतदाताओं को करना चाहिए, चुनाव आयोग को नहीं। उन्होंने यह भी कहा कि उनका विरोध किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं है, बल्कि चुनावी प्रक्रिया और सत्ता के इस्तेमाल के तरीके को लेकर है।
राज ठाकरे ने दावा किया कि विधानसभा चुनाव के दौरान लाखों मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में जोड़े गए और अब SIR के माध्यम से बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने की आशंका है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि मतदाता सूची से इतने लोगों के नाम हटते हैं तो इसका आधार क्या होगा।
उद्धव बोले- चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति पर भी सवाल
उद्धव ठाकरे ने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग में नियुक्तियां किस प्रक्रिया से होती हैं, इस पर चर्चा जरूरी है। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले चयन प्रक्रिया में भारत के मुख्य न्यायाधीश की भूमिका थी, लेकिन बाद में व्यवस्था में बदलाव किया गया।
उद्धव ठाकरे ने मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने का भी दावा किया। उन्होंने पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में मतदाता सूची से जुड़े विवादों का जिक्र करते हुए कहा कि मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा जरूरी है।
SIR को लेकर चुनाव आयोग पर उठे सवाल
SIR को लेकर चुनाव आयोग के भीतर मतभेद की खबरों का भी प्रदर्शन के दौरान उल्लेख किया गया। एक रिपोर्ट के मुताबिक चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने SIR से संबंधित फैसलों और आदेशों पर रिकॉर्ड में कई बार आपत्ति दर्ज की थी। रिपोर्ट में दावा किया गया कि कुछ निर्णय उनकी जानकारी या सिफारिश के बिना जारी किए गए।
हालांकि चुनाव आयोग ने कहा है कि किसी भी संस्थान में विचार-विमर्श के दौरान अलग-अलग राय सामने आना सामान्य प्रक्रिया है। आयोग के मुताबिक उसके सभी आदेश निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत जारी किए गए हैं।