पुलिस अधिकारी पर आपत्तिजनक व्यवहार का आरोप; एफआईआर की मांग को लेकर पत्रकारों ने थाने के बाहर किया प्रदर्शन, 200 प्रदर्शनकारी हिरासत में
नई दिल्ली में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान तीन महिला पत्रकारों ने दिल्ली पुलिस के एक अधिकारी पर बदसलूकी का आरोप लगाया है। एक महिला पत्रकार ने दावा किया कि प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने के दौरान पुलिस अधिकारी ने उनके साथ अभद्र व्यवहार किया। मामले की जांच अब क्राइम ब्रांच को सौंप दी गई है। महिला पत्रकारों का आरोप है कि शिकायत के बावजूद तत्काल एफआईआर दर्ज नहीं की गई, जिसके विरोध में पत्रकारों ने पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने के बाहर प्रदर्शन किया।
नई दिल्ली। जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान महिला पत्रकारों के साथ कथित बदसलूकी का मामला सामने आया है। तीन महिला पत्रकारों ने दिल्ली पुलिस के एक अधिकारी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। मामले की जांच क्राइम ब्रांच को सौंप दी गई है। क्राइम ब्रांच महिला पत्रकारों के बयान दर्ज करने के साथ घटनास्थल के सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्यों की पड़ताल करेगी।
एक महिला पत्रकार का आरोप है कि प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने के दौरान वहां पर्याप्त संख्या में महिला पुलिसकर्मी मौजूद नहीं थीं। उनका दावा है कि एआईएसए अध्यक्ष नेहा बोरा को हिरासत में लेने के दौरान एसीपी विवेक भगत ने उनके सीने पर हाथ मारा और धक्का देकर वहां से चले गए। पुलिस की ओर से लगाए गए इन आरोपों पर जांच के बाद स्थिति स्पष्ट होगी।

एफआईआर की मांग को लेकर थाने के बाहर प्रदर्शन
महिला पत्रकारों ने आरोप लगाया कि घटना के बाद कई घंटे तक एफआईआर दर्ज नहीं की गई। इसके बाद बड़ी संख्या में पत्रकार पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने के बाहर पहुंच गए और कार्रवाई की मांग को लेकर धरने पर बैठ गए। एक महिला पत्रकार ने वीडियो जारी कर दावा किया कि वह करीब साढ़े तीन घंटे से एफआईआर दर्ज होने का इंतजार कर रही थीं।
सिविल जस्टिस एंड पीस से जुड़े संगठन ने भी सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए दावा किया कि पुलिस ने यौन उत्पीड़न की शिकायत पर तत्काल एफआईआर दर्ज नहीं की। संगठन के अनुसार पुलिस पहले सीसीटीवी फुटेज की जांच करना चाहती थी।

लगातार दूसरे दिन जंतर-मंतर पहुंचे प्रदर्शनकारी
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर लगातार दूसरे दिन प्रदर्शन हुआ। इसमें एआईएसए सहित विभिन्न छात्र संगठनों और सिविल सोसायटी से जुड़े लोग शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने पटेल चौक से जंतर-मंतर तक मार्च करने की कोशिश की। पुलिस और अर्धसैनिक बलों ने उन्हें रोकने के लिए बैरिकेडिंग की थी। पुलिस के मुताबिक करीब 200 लोगों को हिरासत में लिया गया।
इससे पहले 2 सितंबर को भी जंतर-मंतर और आसपास प्रदर्शन हुआ था। उस दौरान करीब 1,000 लोगों को हिरासत में लिए जाने की जानकारी सामने आई थी। शुक्रवार के प्रदर्शन को लेकर पार्लियामेंट स्ट्रीट और कनॉट प्लेस थाने में तीन एफआईआर दर्ज की गई थीं।
SIR को लेकर चुनाव आयोग पर सवाल
जंतर-मंतर पर चल रहा प्रदर्शन चुनाव आयोग की एसआईआर प्रक्रिया को लेकर भी केंद्रित है। एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में एसआईआर से जुड़े फैसलों और आदेशों पर कई बार आपत्ति दर्ज की थी। रिपोर्ट के मुताबिक दोनों अधिकारियों ने कुछ निर्णयों को अपनी जानकारी या सिफारिश के बिना जारी किए जाने की बात कही थी।
चुनाव आयोग ने इस पर कहा है कि किसी संस्था में विचार-विमर्श के दौरान अलग-अलग राय और टिप्पणियां सामने आना सामान्य प्रक्रिया है। आयोग के अनुसार उसके सभी आदेश निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत जारी किए गए हैं और उन्हें आवश्यक कानूनी आधार प्राप्त है।