क्रिकेट, कबड्डी और हॉकी में भारत का दबदबा कायम, लेकिन ओलिंपिक खेलों में प्रदर्शन कमजोर; 2022 के 28 गोल्ड से भी नीचे आया भारत
एशियन गेम्स में भारत ने क्रिकेट, कबड्डी और हॉकी जैसे खेलों में अपनी मजबूत स्थिति जरूर कायम रखी, लेकिन पूरे खेल प्रदर्शन पर नजर डालें तो तस्वीर उतनी मजबूत नजर नहीं आती। भारत के खाते में 21 स्वर्ण पदक आए, जबकि चीन ने 169 गोल्ड जीतकर भारत से करीब आठ गुना ज्यादा स्वर्ण हासिल किए। खास बात यह है कि दोनों देशों की आबादी में बहुत बड़ा अंतर नहीं है। ऐसे में सवाल उठता है कि खेल प्रतिभा, सुविधाओं और अंतरराष्ट्रीय स्तर की तैयारी के मामले में भारत कहां पीछे रह जाता है।
खेल (ए)। एशियन गेम्स में भारत के लिए टीम गेम्स में प्रदर्शन उत्साह बढ़ाने वाला रहा। क्रिकेट, कबड्डी और हॉकी में महिला और पुरुष वर्ग को मिलाकर भारत ने सभी 6 स्वर्ण पदक अपने नाम किए। इन खेलों में भारतीय खिलाड़ियों और टीमों का दबदबा साफ दिखाई दिया। हालांकि व्यक्तिगत और अन्य खेलों को मिलाकर पूरे अभियान का आकलन करें तो भारत को अभी लंबी दूरी तय करनी है।
भारत इस बार 2022 एशियन गेम्स के अपने प्रदर्शन को भी बरकरार नहीं रख सका। पिछली बार देश ने 28 स्वर्ण पदक जीते थे, जबकि इस बार यह संख्या घटकर 21 रह गई। दूसरी ओर चीन ने 169 स्वर्ण पदकों के साथ पदक तालिका में बड़ी बढ़त बनाई। चीन के स्वर्ण पदकों की संख्या भारत से करीब आठ गुना अधिक रही।
यह अंतर केवल खिलाड़ियों की संख्या का सवाल नहीं है। खेलों में सफलता के लिए बचपन से प्रतिभा की पहचान, प्रशिक्षकों की उपलब्धता, खेल विज्ञान, पोषण, आधुनिक प्रशिक्षण केंद्र, प्रतियोगिताओं का अनुभव और अंतरराष्ट्रीय स्तर की तैयारी जैसे कई पहलू महत्वपूर्ण होते हैं।
भारत में क्रिकेट जैसे लोकप्रिय खेलों के अलावा कई अन्य खेलों में प्रतिभाओं की बड़ी संख्या मौजूद है, लेकिन हर प्रतिभा को लंबे समय तक उच्चस्तरीय प्रशिक्षण और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं का अवसर नहीं मिल पाता। कई खेलों में जमीनी स्तर से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक मजबूत ढांचे की जरूरत बनी हुई है।
चीन ने लंबे समय से विभिन्न खेलों में विशेषज्ञ प्रशिक्षण और पदक की संभावनाओं वाले खेलों पर व्यवस्थित तरीके से काम किया है। भारत के सामने चुनौती यह है कि टीम खेलों की सफलता को व्यक्तिगत खेलों तक भी कैसे पहुंचाया जाए और प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को शुरुआती स्तर से ही अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप तैयार किया जाए।
एशियन गेम्स के आंकड़े इसी अंतर की ओर संकेत करते हैं। भारत के पास बड़ी आबादी, प्रतिभा और खेलों में बढ़ती रुचि है, लेकिन इन संसाधनों को लगातार अंतरराष्ट्रीय पदकों में बदलने के लिए प्रशिक्षण व्यवस्था और खेल संस्कृति को और मजबूत करने की जरूरत दिखाई देती है।