रेड्डी अन्ना-162 और फेयरप्ले दर्पण ऐप के पैनल का संचालन करने का आरोप, युवकों को 20 से 25 हजार रुपए महीने पर रखा था
दुर्ग पुलिस ने महाराष्ट्र के ठाणे में ऑनलाइन सट्टा संचालित करने वाले नेटवर्क का खुलासा करते हुए 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपी बहुमंजिला इमारत की 25वीं मंजिल पर किराए के फ्लैट से सट्टा पैनल चला रहे थे। कार्रवाई में 31 मोबाइल फोन, 4 लैपटॉप और बैंक खातों से जुड़े दस्तावेज बरामद किए गए हैं। प्रारंभिक जांच में संबंधित खातों के जरिए करोड़ों रुपए के लेन-देन की जानकारी सामने आई है।
दुर्ग-भिलाई। ऑनलाइन सट्टे के अवैध कारोबार पर कार्रवाई करते हुए दुर्ग जिले की एंटी साइबर क्राइम यूनिट (एसीसीयू) और वैशाली नगर पुलिस की संयुक्त टीम ने महाराष्ट्र के ठाणे में दबिश दी। पुलिस ने मौके से 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया है कि आरोपी रेड्डी अन्ना-162 और फेयरप्ले दर्पण नाम के ऑनलाइन सट्टा ऐप के पैनल का संचालन कर रहे थे।
पुलिस के अनुसार, एसीसीयू को सूचना मिली थी कि कुछ युवक म्यूल बैंक खातों के माध्यम से ऑनलाइन सट्टे की रकम का लेन-देन कर रहे हैं। सूचना की तस्दीक के बाद टीम ने ठाणे में कार्रवाई की। आरोपी एक बहुमंजिला इमारत की 25वीं मंजिल पर किराए के फ्लैट में रहकर इस गतिविधि को अंजाम दे रहे थे। पुलिस ने दो मकानों में दबिश देकर मुख्य आरोपियों समेत 10 लोगों को हिरासत में लिया।
कार्रवाई के दौरान पुलिस ने 4 लैपटॉप, 31 मोबाइल फोन, एटीएम कार्ड, बैंक खातों से संबंधित विवरण, सट्टे के लेन-देन का हिसाब और अन्य दस्तावेज जब्त किए हैं। जब्त बैंक खातों की शुरुआती जांच में करोड़ों रुपए के लेन-देन के संकेत मिले हैं। पुलिस अब इस रकम के स्रोत और इससे जुड़े अन्य लोगों की जानकारी जुटा रही है।
मासिक वेतन पर युवकों को जोड़ते थे
पुलिस की शुरुआती जांच के मुताबिक, विष्णु तिवारी और मेहुल निषाद पैनल संचालन में मुख्य भूमिका निभा रहे थे। आरोप है कि वे अलग-अलग स्थानों के युवकों को पैसों का लालच देकर अपने नेटवर्क में शामिल करते थे। पकड़े गए युवकों को किराए के फ्लैट में ही रहना पड़ता था। इसके बदले उन्हें हर महीने करीब 20 से 25 हजार रुपए दिए जाते थे।
सट्टे के कामकाज से जुड़ी सूचनाओं के आदान-प्रदान के लिए आरोपियों ने व्हाट्सएप ग्रुप भी बना रखा था। पुलिस इस ग्रुप में साझा किए गए संदेशों और जब्त इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में मौजूद डेटा की जांच कर रही है।
सामान लाने की जिम्मेदारी भी तय थी
गिरफ्तार आरोपियों में बिहार निवासी संतोष राम भी शामिल है। पुलिस के अनुसार, उसे फ्लैट में रह रहे अन्य लोगों के लिए राशन और जरूरत का सामान लाने की जिम्मेदारी दी गई थी। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि सट्टा पैनल के संचालन में प्रत्येक आरोपी की क्या भूमिका थी और इस नेटवर्क के तार किन अन्य लोगों से जुड़े हैं।
म्यूल खातों से लेन-देन की जांच
पुलिस को जांच के दौरान कई ऐसे बैंक खातों की जानकारी मिली है, जिनका इस्तेमाल सट्टे से जुड़ी रकम के लेन-देन के लिए किए जाने की आशंका है। इन खातों के साथ ही मोबाइल फोन और लैपटॉप में मौजूद डिजिटल जानकारी की पड़ताल की जा रही है। पुलिस को उम्मीद है कि इससे नेटवर्क के अन्य सदस्यों, आर्थिक लेन-देन और सट्टे के कारोबार के दायरे का पता चल सकेगा।
ये आरोपी गिरफ्तार
पुलिस ने विष्णु तिवारी, मेहुल निषाद, अंकित निषाद, नितेश कुमार, नरेश कन्हाई, दीपक कश्यप, हर्षवर्धन निषाद, संतोष राम, भुवन देवांगन और चेतन ध्रुव को गिरफ्तार किया है।
एएसपी ने बताया- करोड़ों के लेन-देन के संकेत
दुर्ग के एएसपी शोभराज अग्रवाल के अनुसार, वैशाली नगर थाना पुलिस और एसीसीयू को ठाणे में किराए के मकानों से ऑनलाइन सट्टा संचालित किए जाने की सूचना मिली थी। इसके आधार पर संयुक्त टीम ने कार्रवाई कर 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया। मौके से मोबाइल, लैपटॉप, एटीएम कार्ड और बैंक खातों से संबंधित दस्तावेज जब्त किए गए हैं।
उन्होंने बताया कि बैंक खातों में करोड़ों रुपए के लेन-देन की जानकारी सामने आई है। पुलिस डिजिटल उपकरणों और बैंकिंग रिकॉर्ड की जांच कर रही है, ताकि सट्टा नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान की जा सके। सभी आरोपियों को न्यायालय में पेश कर दिया गया है।