– तेज बहाव में गर्म पानी का कुंड बहा, पुनाखा-गासा हाईवे क्षतिग्रस्त
– बंगाल और असम में अलर्ट, अलीपुरद्वार में 10 हजार से अधिक लोग सुरक्षित स्थानों पर भेजे गए
– संकोश नदी का जलस्तर बढ़ने से निचले इलाकों में सतर्कता, राहत-बचाव दल तैनात
थिम्पू/कोलकाता (ए)। भूटान में शिंताफू ग्लेशियर झील से अचानक पानी निकलने के बाद कई इलाकों में तबाही का मंजर देखने को मिला। पानी के तेज बहाव ने प्रसिद्ध गासा त्साचु गर्म पानी के कुंड को नुकसान पहुंचाया, वहीं पुनाखा-गासा हाईवे का एक हिस्सा भी टूट गया। सड़कों पर मलबा और पेड़ जमा होने से आवागमन प्रभावित हुआ। शुरुआती जानकारी के अनुसार, घटना में अब तक किसी की मौत की खबर नहीं है।
झील से निकले पानी के कारण नदियों का जलस्तर बढ़ने लगा है। इससे भारत के पश्चिम बंगाल और असम के नदी किनारे बसे निचले इलाकों में बाढ़ की आशंका पैदा हो गई है। संभावित खतरे को देखते हुए दोनों राज्यों में प्रशासन को सतर्क किया गया है। पश्चिम बंगाल के अलीपुरद्वार जिले में 10 हजार से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों और राहत शिविरों में पहुंचाया गया है। प्रभावित क्षेत्रों में रातभर सायरन बजाकर लोगों को सावधान किया गया। राष्ट्रीय आपदा मोचन बल, राज्य आपदा मोचन बल और अन्य बचाव दलों को भी तैनात किया गया है।
जानकारी के मुताबिक, 29 अक्टूबर की शाम भूटान के गासा जिले के लुंगो क्षेत्र में स्थित शिंताफू त्शो झील से पानी बाहर निकलने लगा। यह झील वाकिला पर्वत के नीचे स्थित है और संभावित रूप से खतरनाक ग्लेशियर झीलों में शामिल है। पानी का तेज बहाव मो छू नदी के जलग्रहण क्षेत्र से आगे बढ़ा और रात करीब 8:15 बजे ताकत्सेमाखांग इलाके तक पहुंचने की सूचना मिली।
बाढ़ के पानी ने गासा त्साचु के गर्म पानी के कुंड की सुविधाओं को तबाह कर दिया। पुनाखा जिले में सिंचाई के लिए स्थापित सौर ऊर्जा आधारित लिफ्टिंग सिस्टम भी क्षतिग्रस्त हुआ। वहीं, शिंगचाला नदी में उफान के कारण कुछ गांवों में पानी घुस गया। लाया गांव की ओर जाने वाली सड़क का हिस्सा बह गया, जबकि पुनाखा-गासा हाईवे पर पेड़ और मलबा जमा होने से यातायात रोकना पड़ा।
भारत में किन इलाकों पर खतरा
भूटान से निकलने वाली मो छू और फो छू नदियां आगे मिलकर पुनात्सांगछू नदी बनाती हैं। यह नदी भारत में प्रवेश करने के बाद संकोश नदी कहलाती है। इसके जलस्तर में बढ़ोतरी से पश्चिम बंगाल के अलीपुरद्वार और जलपाईगुड़ी तथा असम के कोकराझार और धुबरी जिलों के निचले क्षेत्रों में बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है। संकोश नदी आगे चलकर ब्रह्मपुत्र में मिलती है। इसी आशंका को देखते हुए नदी किनारे के इलाकों में निगरानी बढ़ाई गई है।