148 दिन से रायपुर की जेल में बंद था अमन; पूछताछ के लिए झारखंड पुलिस लेकर जा रही थी रांची, रास्ते में मुठभेड़ में मारा गया
झारखंड पुलिस के लिए मोस्ट वांटेड रहे कुख्यात अपराधी अमन साहू की कहानी एनकाउंटर में खत्म हो गई। मंगलवार देर शाम रायपुर से रांची ले जाते वक्त पलामू के पास हुए घटनाक्रम में पुलिस का दावा है कि अमन ने भागने की कोशिश की और हथियार छीनकर फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में उसे मार गिराया गया। अमन पर राज्यभर में 50 से ज्यादा संगीन केस दर्ज थे और उसका गैंग खनन और कारोबारी दुनिया में दहशत फैला रहा था।
रायपुर। झारखंड के कुख्यात गैंगस्टर अमन साहू का आतंक आखिरकार पुलिस एनकाउंटर में खत्म हो गया। झारखंड पुलिस उसे रायपुर की सेंट्रल जेल से पूछताछ के लिए रांची ला रही थी। देर शाम करीब 8:11 बजे पुलिस उसे लेकर निकली थी। पलामू के समीप रास्ते में वाहन असंतुलित होकर दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इसी दौरान अमन ने पुलिस की बंदूक छीन ली और भागने की कोशिश की। पुलिस पर फायरिंग करते हुए वह फरार होने की कोशिश कर रहा था, लेकिन जवाबी फायरिंग में वह ढेर हो गया।


बताया गया है कि अमन को अक्टूबर में रायपुर लाया गया था, जहां वह 148 दिनों से सेंट्रल जेल में बंद था। उसे रांची में कोयला कारोबारी बिपिन मिश्रा पर हुई फायरिंग के मामले में पूछताछ के लिए झारखंड लाया जा रहा था। 7 मार्च को हुई उस वारदात में मिश्रा और उनके ड्राइवर को गोली लगी थी। प्राथमिक जांच में खुलासा हुआ कि हमले के पीछे अमन साहू का ही निर्देश था, जो जेल से अपने गिरोह को ऑपरेट कर रहा था। पुलिस ने अमन को अत्यंत सुरक्षा के बीच शिफ्ट किया था। उसके साथ चल रहे काफिले में हथियारबंद टीम मौजूद थी। फिर भी उसने मौका पाकर पुलिस को चकमा देने की कोशिश की।
अमन साहू का नेटवर्क रांची, रामगढ़, हजारीबाग, चतरा, धनबाद, बोकारो, लातेहार और पलामू तक फैला हुआ था। उसका गिरोह खनन कंपनियों, ठेकेदारों, बिल्डरों और ट्रांसपोर्टरों से रंगदारी वसूलने में लिप्त था। रंगदारी नहीं देने पर उनके दफ्तरों या व्यक्तियों पर गोलीबारी आम बात हो गई थी। पिछले छह महीने में उसके गुर्गों ने आधा दर्जन से ज्यादा वारदातों को अंजाम दिया। कारोबारियों में उसका इतना खौफ था कि कई लोगों ने घर से निकलना भी कम कर दिया था। अमन की मौत के साथ पुलिस को उम्मीद है कि उसके गैंग की गतिविधियों पर लगाम लगेगी।