जहां बिगड़े हालात, वहां भेजे जाते हैं विजय अग्रवाल; बेसिक पुलिसिंग के मास्टर, इंवेस्टिगेशन में माहिर, अब वीवीआईपी जिला दुर्ग में मिली अहम ज़िम्मेदारी
छत्तीसगढ़ के सबसे संवेदनशील जिलों में गिने जाने वाले दुर्ग की कमान अब आईपीएस विजय अग्रवाल को सौंप दी गई है। राज्य सरकार द्वारा जारी तबादला सूची में उन्हें दुर्ग का नया पुलिस अधीक्षक (SP) बनाया गया है। विजय अग्रवाल को छत्तीसगढ़ पुलिस का ‘तुरुप का इक्का’ और ‘ट्रबलशूटर’ माना जाता है — जहां हालात बिगड़ते हैं, वहां उन्हें भेजा जाता है, और वे हालात को संभालकर दिखाते हैं।
रायपुर। राज्य सरकार ने रविवार को बड़े स्तर पर आईपीएस अधिकारियों का तबादला आदेश जारी किया, जिसमें 11 जिलों के एसपी बदले गए। इनमें सबसे अहम चर्चा दुर्ग के नए पुलिस कप्तान विजय अग्रवाल को लेकर हो रही है। वे ऐसे अफसर माने जाते हैं, जो चुनौतीपूर्ण हालात में भी मोर्चा संभालने के लिए सबसे पहली पसंद होते हैं।

विजय अग्रवाल की पोस्टिंग का इतिहास बताता है कि वे वहां तैनात किए जाते हैं, जहां हालात सामान्य से असामान्य हो चुके होते हैं। चाहे बिलासपुर में 2018 की लाठीचार्ज घटना हो, जांजगीर में भीम आर्मी का उग्र प्रदर्शन, अंबिकापुर में कांग्रेस नेताओं के बीच झगड़े, या फिर बलौदा बाजार हिंसा, हर बार एक नाम सामने आया — विजय अग्रवाल।
बेसिक पुलिसिंग के एक्सपर्ट, जनता से सीधा संवाद
विजय अग्रवाल को बेसिक पुलिसिंग का एक्सपर्ट माना जाता है। उनकी कार्यशैली में जनता से संवाद, सख्त लेकिन संवेदनशील रवैया और तेज़ इन्वेस्टिगेशन प्रमुख रहे हैं। यही वजह है कि वे जहाँ भी तैनात हुए, वहाँ व्यवस्था जल्द पटरी पर लौट आई।
दुर्ग के लिए पुराने नहीं हैं विजय
आईपीएस अग्रवाल पहले भी दुर्ग जिले में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ट्रैफिक) और एएसपी (क्राइम) के रूप में काम कर चुके हैं। साथ ही वे भिलाई स्थित प्रथम वाहिनी के कमांडेंट भी रहे हैं। यानी दुर्ग की भौगोलिक और सामाजिक समझ उनके पास पहले से है।
5 जिलों में SP की भूमिका निभा चुके
विजय अग्रवाल अब तक जशपुर, जांजगीर, अंबिकापुर, बलौदा बाजार और अब दुर्ग में एसपी के तौर पर सेवा दे चुके हैं। हर बार उनकी पोस्टिंग किसी न किसी संवेदनशील परिस्थिति के बाद हुई, और हर बार उन्होंने हालात संभालकर दिखाए।
सरकार की पहली पसंद क्यों?
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय खुद भी विजय अग्रवाल की कार्यशैली से वाकिफ हैं। यही कारण है कि सरकार बदलने के बाद भी उन्हें चुनौतीपूर्ण जिलों की ज़िम्मेदारी सौंपी जाती रही है। सूत्र बताते हैं कि बलौदा बाजार हिंसा के बाद खुद मुख्यमंत्री निवास में हुई मीटिंग में विजय का नाम प्रस्तावित किया गया और सबकी सहमति से मंजूरी मिली।