“श्रीनगर में फंसे रायपुर, भिलाई, चिरमिरी और बिलासपुर के 82 पर्यटक; मृतकों में रायपुर के उद्योगपति भी शामिल”
छत्तीसगढ़ से कश्मीर की वादियों में सुकून की तलाश में पहुंचे दर्जनों सैलानी अचानक आतंक और गोलियों की दहशत में फंस गए। पहलगाम में हुए खूनी आतंकी हमले में रायपुर के एक पर्यटक की मौत हो गई, जबकि 82 अन्य सैलानी श्रीनगर में किसी तरह सुरक्षित बचाए गए। “अगर हम कुछ घंटे पहले निकलते, तो शायद अब इस दुनिया में न होते,”—यह शब्द खुद उन पर्यटकों ने कहे हैं, जिनकी ज़िंदगी चंद मिनटों की देरी ने बचा ली।
“धरती का स्वर्ग” माने जाने वाले कश्मीर की शांत वादियां मंगलवार को गोलियों की आवाज़ से दहल उठीं। आतंकियों ने पहलगाम में पर्यटकों को निशाना बनाकर अंधाधुंध फायरिंग की, जिसमें 26 लोगों की जान चली गई। इसी दौरान छत्तीसगढ़ के 82 सैलानी बाल-बाल बच गए। इन सैलानियों में रायपुर, भिलाई, चिरमिरी और बिलासपुर के परिवार शामिल थे, जो श्रीनगर में ठहरे हुए थे और हमले से कुछ समय पहले ही पहलगाम की ओर रवाना होने वाले थे।
रायपुर के स्टील व्यवसायी दिनेश मिरानिया की आतंकियों ने उनकी पत्नी और बच्चों के सामने गोली मारकर हत्या कर दी। उनका पार्थिव शरीर दिल्ली से रायपुर लाया जाएगा।
मुख्यमंत्री और गृहमंत्री का दखल:
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा लगातार श्रीनगर में फंसे पर्यटकों के संपर्क में हैं। सभी को सुरक्षित निकालने के लिए राज्य सरकार केंद्र और स्थानीय प्रशासन से समन्वय में है।

पर्यटकों के बयान:
पर्यटन पर निकले बिलासपुर नगर निगम के चीफ इंजीनियर राजकुमार मिश्रा ने बताया कि वे बैसरन घाटी जाने वाले थे, लेकिन ऐन मौके पर योजना बदलनी पड़ी। हमले की खबर फैलते ही चारों ओर अफरातफरी मच गई। सुरक्षा बलों ने सभी पर्यटकों को सुरक्षित होटलों में पहुंचाया।
ममता शर्मा की सूझबूझ:
भिलाई, रायपुर और बिलासपुर के 65 सैलानियों की यात्रा की अगुवाई कर रहीं ट्रैवल ऑपरेटर ममता शर्मा ने बताया कि समय पर निकले होते तो शायद पहलगाम पहुंच चुके होते। उन्होंने बताया कि फोर्स ने उन्हें गाड़ियों में ही रुकने का निर्देश दिया और किसी तरह वे श्रीनगर लौटने में सफल रहे।

चिरमिरी के सैलानियों की कहानी:
चिरमिरी से गए 11 सैलानी जब बेसरन घाटी में थे, तभी फायरिंग शुरू हो गई। उनके साथ कश्मीरी व्यवसायी नजाकत अली थे, जिन्होंने तुरंत सूझबूझ दिखाते हुए सभी को सुरक्षित रास्ते से निकाल कर होटल तक पहुंचाया। इन सभी को आर्मी कैंप में शरण दी गई है और वे अब दिल्ली के लिए रवाना हो रहे हैं।
जमीनी हालात:
श्रीनगर में फिलहाल कर्फ्यू जैसे हालात हैं। सेना के जवान हर जगह तैनात हैं और पर्यटकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा रही है। स्थानीय प्रशासन अलर्ट पर है और सभी पर्यटकों को सुरक्षित ठिकानों पर रखा गया है।
संवेदनशीलता और सुरक्षा का इम्तहान:
यह घटना न केवल मानवता पर एक और आघात है, बल्कि सरकार, सेना और स्थानीय लोगों के संयम व संवेदनशीलता का भी इम्तहान है। कुछ पल की देर ने दर्जनों परिवारों की ज़िंदगी बचा ली—लेकिन कुछ के लिए ये पल हमेशा के लिए एक टीस बन गए।