सोसायटी ने वसूला जलकर, पर निगम में जमा नहीं की राशि; नागरिकों ने जताया आक्रोश, निगम ने सर्वे शुरू किया
भिलाई के नेहरू नगर क्षेत्र स्थित स्मृतिनगर गृह निर्माण संस्था पर नगर निगम का 1.78 करोड़ रुपये से अधिक का जलकर बकाया है। रहवासियों का आरोप है कि उनसे नियमित रूप से जलकर की वसूली की जाती रही है, लेकिन वह राशि नगर निगम के खाते में नहीं पहुंची। इस मामले में निगम ने दो बार नोटिस जारी कर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी है।
भिलाईनगर। नगर पालिक निगम भिलाई द्वारा स्मृतिनगर गृह निर्माण संस्था मर्यादित को नोटिस जारी कर बताया गया है कि 22 मार्च 2025 की स्थिति में सोसायटी पर ₹1,78,67,520 का जलकर बकाया है। निगम के अनुसार, यह राशि समय पर जमा नहीं की गई है, जबकि सोसायटी रहवासियों से नियमित शुल्क वसूलती रही है।
स्थानीय पार्षद मुकेश कुमार अग्रवाल सहित कई नागरिकों ने निगम में लिखित शिकायत दर्ज कराई है कि सोसायटी प्रशासन जलकर की राशि वसूलने के बाद भी उसे निगम को नहीं दे रहा, जिससे नागरिकों में रोष है।
सोसायटी की ओर से गलत जानकारी फैलाने का भी आरोप है कि इस मामले में उच्च न्यायालय से स्टे ऑर्डर है, जबकि ऐसा कोई स्टे अस्तित्व में नहीं है।
आयुक्त राजीव कुमार पाण्डेय के निर्देश पर निगम ने स्मृतिनगर के मकानों का सर्वे प्रारंभ कर दिया है। अब तक की जानकारी के अनुसार, सोसायटी में 1268 मकान बने हुए हैं जिनमें आवासीय, व्यावसायिक और मिश्रित उपयोग वाले मकान शामिल हैं। साल 2008 के अनुबंध के तहत केवल 792 मकानों की जलकर गणना की गई थी, जबकि अब 400 से अधिक मकान और नल कनेक्शन जुड़ चुके हैं।
राज्य सरकार के राजपत्र अनुसार जलकर की मासिक दरें इस प्रकार हैं:
- आवासीय: ₹200
- आवास सह व्यवसाय: ₹350
- व्यवसायिक: ₹800
- संपत्तिकर से बाहर: ₹60
सहायक राजस्व अधिकारी धीरज साहू ने बताया कि संस्था को 12 मार्च और 22 मार्च 2025 को दो नोटिस भेजे गए हैं। संस्था द्वारा करीब दो साल पहले ₹30 लाख की आंशिक राशि ही निगम कोष में जमा कराई गई थी। यदि वास्तविक गणना की जाए तो जलकर बकाया 3 करोड़ रुपए से भी अधिक हो सकता है।
निवासियों ने निगम एवं जिला प्रशासन से सोसायटी की कार्यप्रणाली की भी शिकायत की है — जैसे:
- जलकर और अन्य शुल्कों में अधिभार वसूली
- पार्कों के पेड़ों की अवैध कटाई, जिससे पर्यावरण प्रभावित
- भूमि खसरा नंबरों में छेड़छाड़, जिस पर राजस्व विभाग सीमांकन कर रहा है
रहवासियों की मांग है कि सोसायटी को नगर निगम अपने अधिपत्य में ले, ताकि पारदर्शी प्रशासन सुनिश्चित हो सके। नगर निगम ने चेतावनी दी है कि निर्धारित समय में भुगतान नहीं होने पर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी, हालांकि मानवीय आधार पर जल आपूर्ति नहीं रोकी गई है।