भिलाई में आयोजित विचार गोष्ठी में बोले वक्ता – हर छह महीने चुनाव की संस्कृति लोकतंत्र नहीं, अराजकता है; समय, संसाधन और सुशासन के लिए जरूरी है चुनावी समन्वय
देशभर में ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ को लेकर चल रही बहस अब ज़मीन तक पहुंचने लगी है। भिलाई के सेक्टर-4 में आयोजित एक दिवसीय संगोष्ठी में पूर्व विधानसभा अध्यक्ष प्रेमप्रकाश पाण्डेय ने इस अवधारणा को समय की मांग बताया। वक्ताओं ने कहा – “हर बार चुनाव आचार संहिता नहीं, विकास की रोक बनती है।”
भिलाई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदर्शी पहल ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ के समर्थन में अब जमीनी संवाद तेज़ हो गया है। भिलाई सेक्टर-4 में यंगिस्तान के तत्वावधान में आयोजित एक दिवसीय संगोष्ठी में समाज, राजनीति और शिक्षा जगत के प्रतिनिधियों ने इस विचार को लोकतांत्रिक सुधार की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया।
मुख्य अतिथि पूर्व विधानसभा अध्यक्ष प्रेमप्रकाश पाण्डेय ने कहा कि भारत में हर छह महीने चुनावों का सिलसिला सुशासन को बाधित करता है। बार-बार चुनाव न सिर्फ़ वित्तीय संसाधनों की बर्बादी है, बल्कि यह प्रशासनिक ऊर्जा और जनता की उम्मीदों को भी नुकसान पहुंचाता है। उन्होंने सवाल उठाया – क्या बार-बार के चुनाव देश को एक स्थिर दिशा दे सकते हैं?

“एक राष्ट्र, एक चुनाव कोई राजनीतिक जुमला नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक दक्षता का नया विजन है,” पाण्डेय ने कहा। उन्होंने यह भी जोड़ा कि चुनावी आचार संहिता लागू होते ही प्रशासनिक तंत्र ठहर जाता है, जिससे योजनाएं लटक जाती हैं और जनता को सीधे नुकसान होता है।
मनीष पाण्डेय, भाजयुमो कार्यसमिति सदस्य और यंगिस्तान संयोजक ने कहा कि ग्रामीण महिलाएं, युवा, मजदूर वर्ग – सभी बार-बार के चुनावों से परेशान हैं। एक साथ चुनाव से लोकतंत्र में भागीदारी बढ़ेगी, नीतियों में निरंतरता आएगी और विकास की गाड़ी बिना रुके आगे बढ़ेगी।
डॉ. शकील हुसैन, विभागाध्यक्ष, वीवाईटी कॉलेज, दुर्ग ने कहा कि रामनाथ कोविंद समिति का उद्देश्य सिर्फ चुनावों को एक साथ कराना नहीं, बल्कि प्रशासनिक पारदर्शिता और लोकतांत्रिक स्थायित्व को मजबूत करना है। उनका कहना था कि यदि अमेरिका, इंग्लैंड जैसे देशों में तयशुदा समय पर चुनाव संभव हैं, तो भारत में क्यों नहीं?
- भारत में हर साल लाखों कर्मचारी चुनाव में लगते हैं, बाकी सरकारी काम प्रभावित होता है।
- बार-बार आचार संहिता लगने से योजनाएं रुक जाती हैं।
- एक साथ चुनाव से 6 से 7 लाख करोड़ रुपए की बचत संभव।
- युवाओं को मिलेगा नीति-निर्माण में भागीदारी का बेहतर मौका।
- मतदान प्रतिशत बढ़ेगा, और जनता की ऊर्जा बचेगी।
कार्यक्रम में भाजपा जिलाध्यक्ष पुरुषोत्तम देवांगन, बृजेंद्र सिंह, वीरेंद्र साहू, शिरीष अग्रवाल, प्रेमलाल साहू सहित बड़ी संख्या में प्रबुद्धजन, शिक्षाविद, युवाजन और पार्टी कार्यकर्ता शामिल हुए।