“137 साल पुराने स्टेशन ने पहना विकास का नया परिधान, प्रधानमंत्री मोदी ने किया वर्चुअल लोकार्पण, हाईटेक सुविधाओं से लैस हुआ भिलाई-3”
कभी अपने वजूद को तलाशता भिलाई-3 रेलवे स्टेशन, अब अमृत भारत योजना की बदौलत नई रफ्तार और पहचान के साथ लौटा है। 1888 में बनी इस ऐतिहासिक धरोहर को आधुनिकता के रंग में रंगते हुए, सरकार ने इसे तकनीकी और यात्री सुविधाओं के लिहाज से एक आदर्श स्टेशन बना दिया है। आज इसका लोकार्पण खुद प्रधानमंत्री मोदी ने किया।
भिलाई। रेलवे के इतिहास में दर्ज एक और स्वर्णिम पन्ना आज जुड़ गया। दुर्ग जिले का भिलाई-3 रेलवे स्टेशन, जिसे कभी उसकी उपयोगिता और सौंदर्य से पहचाना जाता था, अब अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत पुनर्निर्मित होकर हाइटेक अवतार में सामने आया है।
इस स्टेशन का निर्माण 137 साल पहले, 1888 में हुआ था। धीरे-धीरे इसकी स्थिति जर्जर होती गई, लेकिन अब केंद्र सरकार के महत्वाकांक्षी ‘अमृत भारत’ प्रोजेक्ट से यह स्टेशन फिर से भिलाई का गौरव बन गया है। इसका लोकार्पण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्चुअल माध्यम से किया। इस ऐतिहासिक मौके पर स्टेशन परिसर में केंद्रीय मंत्री तोखन साहू, विधायक रीकेश सेन, विधायक ललित चंद्राकर और डोमलाल कोरसेवाड़ा सहित अनेक गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।
स्टेशन का कायाकल्प 7 करोड़ 21 लाख रुपए की लागत से किया गया है। अब यहां है:
- आधुनिक टिकट काउंटर
- महिला वेटिंग हॉल और सुरक्षित केबिन
- हाई डेफिनिशन सीसीटीवी कैमरे
- एलईडी डिस्प्ले, टॉवर क्लॉक, पीए सिस्टम
- और एक भव्य प्रवेश द्वार जो आगंतुकों का स्वागत करता है।
स्टेशन परिसर में लगा विंटेज इंजन का मॉडल इस क्षेत्र की रेलवे विकास यात्रा को दर्शाता है। यह मॉडल सिर्फ एक सजावटी हिस्सा नहीं, बल्कि समय की गवाही देता प्रतीक बन गया है।
कभी यह स्टेशन मुंबई-हावड़ा रेल लाइन का एक अहम हिस्सा हुआ करता था, लेकिन समय के साथ इसकी पहचान धुंधलाने लगी थी। आज जब यह स्टेशन फिर से जीवित हो उठा है, तो न केवल इसके रास्तों पर ट्रेनें दौड़ेंगी, बल्कि स्थानीय लोगों के गर्व और भावना की रेलगाड़ी भी रफ्तार पकड़ेगी।
स्थानीय नागरिकों की प्रतिक्रिया भी उत्साहजनक रही। लोगों का कहना है कि “सरकार ने स्टेशन को संवार कर केवल एक इमारत नहीं बनाई, बल्कि हमारी स्मृतियों, भावनाओं और उम्मीदों को नया रूप दिया है।”