भारतीय रेलवे अब ट्रेनों की सफाई व्यवस्था को और बेहतर व आधुनिक बनाने की दिशा में एक और कदम बढ़ाने जा रहा है। अब सफाई कार्य में पारंपरिक तरीकों की जगह आधुनिक तकनीक का सहारा लिया जाएगा। रेलवे विभाग ट्रेनों को ड्रोन (Drone) की सहायता से साफ करने की योजना पर काम कर रहा है।
नई दिल्ली (ए)। भारतीय रेलवे ने साफ-सफाई की गुणवत्ता को और ऊंचा करने के लिए नई तकनीक का सहारा लेना शुरू कर दिया है। अब ट्रेनों की बाहरी सफाई के लिए ड्रोन टेक्नोलॉजी का उपयोग किया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य न केवल समय और संसाधनों की बचत करना है, बल्कि सफाई को अधिक प्रभावी, सुरक्षित और पर्यावरण अनुकूल बनाना भी है।
कैसे काम करेगा यह सिस्टम?
ड्रोन से ट्रेन की छत, खिड़कियों और बाहरी हिस्सों की सफाई की जाएगी। ड्रोन में विशेष रूप से डिज़ाइन किया गया वॉटर जेट सिस्टम, हाई प्रेशर नोजल और कैमरे लगे होंगे, जिससे सफाई के दौरान निगरानी भी हो सकेगी। ड्रोन दूर से ऑपरेट किए जाएंगे और सफाई के लिए जैविक व पर्यावरण के अनुकूल क्लीनिंग सॉल्यूशन का इस्तेमाल किया जाएगा।
कहां से हुई शुरुआत?
इस योजना की शुरुआत रेलवे के कुछ चुनिंदा डिवीजनों या वर्कशॉप्स से पायलट प्रोजेक्ट के रूप में की जा रही है। प्रारंभिक परीक्षण सफल रहने के बाद इसे देशभर के बड़े स्टेशनों और कोच यार्ड्स में लागू किया जाएगा।
क्या होंगे फायदे?
- तेजी से सफाई: पारंपरिक सफाई में जो काम घंटों में होता था, वो ड्रोन से कुछ ही मिनटों में हो सकता है।
- सेफ्टी: ऊंचे स्थानों पर चढ़कर सफाई करने की आवश्यकता नहीं रहेगी, जिससे कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी।
- कम लागत: लंबे समय में श्रम और पानी की खपत कम होने से लागत घटेगी।
- पर्यावरण हितैषी: कम पानी और रसायनों के प्रयोग से पर्यावरण को कम नुकसान होगा।
रेलवे की सफाई नीति में बदलाव
रेलवे पहले ही स्वच्छता को लेकर ‘स्वच्छ रेल, स्वच्छ भारत’ अभियान के अंतर्गत कई योजनाएं चला रहा है। इसमें ऑन-बोर्ड हाउसकीपिंग, बायो टॉयलेट्स, स्मार्ट डस्टबिन्स, ऑटोमेटिक वॉशिंग प्लांट जैसी सुविधाएं शामिल हैं। अब ड्रोन तकनीक के जुड़ने से यह अभियान और भी सशक्त होने जा रहा है।