20 से अधिक अफसरों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल, अवैध शराब से 2100 करोड़ से ज्यादा की कमाई; लखमा समेत कई आरोपी पहले से जेल में
छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले में आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) ने सोमवार को विशेष अदालत में 5000 से अधिक पन्नों का विस्तृत चालान दाखिल किया। 29 बंडलों में दर्ज इस चालान में 2019 से 2023 तक हुए करोड़ों के घोटाले का लेखा-जोखा दर्ज है। इस घोटाले में आबकारी विभाग के 20 से अधिक वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका को रेखांकित किया गया है। हालांकि, जिन अफसरों पर आरोप लगे हैं, उनमें से किसी की अभी तक गिरफ्तारी नहीं हुई है।
रायपुर/भिलाई। छत्तीसगढ़ में बहुचर्चित शराब घोटाले की परतें लगातार खुल रही हैं। सोमवार को आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) ने विशेष न्यायालय में एक विशालकाय चालान पेश किया, जिसमें 5000 से ज्यादा पन्नों में 2019 से 2023 तक चले घोटाले का सिलसिलेवार विवरण है। 29 बंडलों में तैयार इस दस्तावेज में आबकारी विभाग के 20 से अधिक वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका दर्ज की गई है।
EOW की जांच में खुलासा हुआ है कि यह घोटाला पूरी तरह से संगठित नेटवर्क के तहत संचालित हुआ। आरोप है कि नेताओं के इशारे पर कार्यरत अधिकारी न केवल नकली होलोग्राम के जरिए अवैध शराब की आपूर्ति करवा रहे थे, बल्कि इसके जरिए सैकड़ों करोड़ की अवैध वसूली भी की गई।
शराब की आपूर्ति पूरी तरह जिला आबकारी अधिकारियों की निगरानी में की जाती थी। दस्तावेजों के मुताबिक, डिस्टलरी से डुप्लीकेट होलोग्राम लगे शराब के पैकेट सीधे दुकानों तक पहुंचाए जाते थे। तत्कालीन सहायक आयुक्त जनार्दन कौरव की देखरेख में यह नकली होलोग्राम छपते थे और इन्हें अमित सिंह, दीपक दुआरी, प्रकाश शर्मा जैसे एजेंट डिस्टलरी तक पहुंचाते थे। ईओडब्ल्यू के अनुसार, इस गिरोह ने तीन वर्षों में लगभग 60 लाख पेटी अवैध शराब की आपूर्ति की और इससे 2100 करोड़ से अधिक की कमाई की गई। इन पैसों का बड़ा हिस्सा नेताओं और अफसरों के सिंडिकेट तक पहुंचाया गया।
चालान में उल्लेख किया गया है कि प्रति पेटी शराब पहले 2840 रुपये में बेची जाती थी, जिसे बाद में बढ़ाकर 3880 रुपये किया गया। इस पूरी योजना से हर साल 70 करोड़ रुपये से अधिक का अवैध टारगेट तय किया जाता था। चालान में जिन अधिकारियों के नाम सामने आए हैं, उनमें तत्कालीन आबकारी आयुक्त IAS निरंजन दास, उपायुक्त अनिमेष नेताम, विजय सेन शर्मा, प्रमोद नेताम, अरविंद पटेल, सौरभ बख्शी, रविश तिवारी सहित अन्य शामिल हैं। इन सभी पर सीधे भ्रष्टाचार, मिलीभगत और अवैध वसूली का आरोप है। EOW ने स्पष्ट किया है कि जांच अब भी जारी है और जल्द ही संबंधित अफसरों की गिरफ्तारी हो सकती है। इस घोटाले में पहले से ही लखमा समेत कई प्रमुख नाम सलाखों के पीछे हैं।